मन्मथनाथ गुप्त जी

मन्मथनाथ गुप्त जी

मन्मथनाथ गुप्त जी : ‘हमें क्रान्तिकारी कहा जाता था, लेकिन हम तो बस आम लोग थे जो अपने देश के लिये अपनी जान कुर्बान करने को तैयार थे।’स्वतंत्रता सेनानी और सिद्धहस्थ लेखक मन्मथनाथ गुप्त जी 13 साल की उम्र में स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बन गये थे। उनके पिता वीरेश्वर विराटनगर (नेपाल) में एक स्कूल…

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आदि कवि महर्षि वाल्मीकि

आदि कवि महर्षि वाल्मीकि

आदि कवि महर्षि वाल्मीकि महर्षि वाल्मीकि भारत की उन विरली विभूतियों में से एक हैं जिनकी उपस्थिति पूरे देश में है और सभी सामाजिक स्वरूप में मान्यता है। हर समाज के लिये वे आदर्श है। अनुसूचित जनजाति भील समाज उन्हें अपना पूर्वज मानता है तो अनुसूचित समाज में एक उप वर्ग स्वयं को उनका वंशज…

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प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा

प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा

प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा : प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा का जन्म एक अत्यन्त गरीब बंगाली परिवार में हुआ था। तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार किसान परिवार की इस बेटी का विवाह मात्र 12 वर्ष की आयु में त्रिलोचन हाजरा से हुआ और 18 वर्ष की अवस्था तक पहुँचते ही…

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शक्ति उपासना का पर्व विजयादशमी

शक्ति उपासना का पर्व विजयादशमी

शक्ति उपासना का पर्व विजयादशमी : भारतीय समाज प्रकृति उपासक है। प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को हम पर्व के रूप में मनाते है। इन पर्वो का सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व है तथा मनुष्य को सत्य आचरण की प्रेरणा देना भी है। जिनमें विजयादशमी का अपना विशेष महत्त्व है। जो असत्य पर सत्य की…

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आज़ाद हिन्द फ़ौज : स्वतंत्रता के स्वप्न से संकल्प तक

आज़ाद हिन्द फ़ौज : स्वतंत्रता के स्वप्न से संकल्प तक

आज़ाद हिन्द फ़ौज : स्वतंत्रता के स्वप्न से संकल्प तक भारत की र रत की स्वतंत्रता का इतिहास उन लोगों के साहस, संघर्ष और बलिदान की कहानी है, जिन्होंने एक स्वतंत्र राष्ट्र का सपना देखा और उसे साकार करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। इस इतिहास में आजाद हिन्द फ़ौज का स्थान विशेष…

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विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना

विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना

विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे भारतीय परंपरा में विजयादशमी का पर्व केवल राम की रावण पर विजय का स्मरण नहीं है, बल्कि यह सत्य पर असत्य की, धर्म पर अधर्म की और संगठन पर बिखरी हुई शक्ति की विजय का प्रतीक है। श्रीगुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर)…

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अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर

अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर

अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर : आप किसी अभिनेता या अभिनेत्री को याद करेंगे तो क्यों करेंगे, उनकी बेहतरीन एक्टिंग, उनकी खूबसूरती, उनके डायलॉग्स या फिर उनको मिलने वाले अवार्ड्स के लिये लेकिन सिनेमा जगत में एक ऐसा भी अभिनेता था जिसे यह देश उनकी देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के लिये याद करेगा,…

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हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी

हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी

हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी : कैप्टन स्मित मच्छार : लहूलुहान शरीर, अडिग हौसला और 174 जिन्दगियों की रक्षा की जंग एक मुस्लिम कट्टरपंथी पायलट हमास अल हमामी के आतंकी प्रयास को असफल करने वाले फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार का साहस भारतीयों की सदियों से चली आ रही साहसी वीरगाथाओं का एक…

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डॉ. कलाम: मिसाइल मैन से 'जनता के राष्ट्रपति' तक की अमर गाथा

डॉ. कलाम: मिसाइल मैन से ‘जनता के राष्ट्रपति’ तक की अमर गाथा

यदि भारत के इतिहास में किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश की जाए जिसने अपनी कड़ी मेहनत, सादगी और दूरदर्शिता से करोड़ों युवाओं की जिंदगी बदल दी, तो सबसे पहला नाम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) का आता है। उन्हें प्यार से ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ (Missile Man of India) और ‘जनता के…

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विचारक दत्तोपन्त ठेंगड़ी

विचारक दत्तोपन्त ठेंगड़ी

विचारक दत्तोपन्त ठेंगड़ी किसी भी राष्ट्र का निर्माण से लेकर उसका वर्तमान और भविष्य युवाओं के हाथों में होता है। भारत जैसा राष्ट्र में, जहाँ दुनिया का सबसे ज्यादा युवाओं की संख्या है, यह बात और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। दत्तोपन्त ठेंगड़ी के विचारों में युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान की…

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