
विशुद्ध हिन्दी के समर्थक राजा लक्ष्मण सिंह: हिन्दी गद्य के महान निर्माता
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विशुद्ध हिन्दी के समर्थक राजा लक्ष्मण सिंह: हिन्दी गद्य के महान निर्माता
उन्नीसवीं शताब्दी का उत्तरार्ध हिन्दी भाषा के विकास और उसकी पहचान का महत्वपूर्ण काल था। इसी समय राजा लक्ष्मण सिंह जैसे विद्वान साहित्यकार, अनुवादक और भाषा-चिन्तक सामने आए, जिन्होंने हिन्दी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा माना। जब हिन्दी और उर्दू के स्वरूप को लेकर व्यापक बहस चल रही थी, तब राजा लक्ष्मण सिंह ने हिन्दी की स्वतंत्र अस्मिता का दृढ़ता से समर्थन किया। उनका मानना था कि हिन्दी अपनी शब्द-सम्पदा, सांस्कृतिक परम्परा और साहित्यिक शक्ति के कारण एक स्वतंत्र एवं समृद्ध भाषा है।

जिस किसान को लोग पागल कहते थे… आज उसी के खेत देखने देश-विदेश से लोग आते हैं!
खेती में कुछ नहीं रखा…” यह वाक्य आपने भी न जाने कितनी बार सुना होगा। आज भी हजारों युवा खेती छोड़कर शहरों की ओर इसलिए

पद्म श्री अंके गौड़ा: पुस्तकों के लिए समर्पित जीवन, समाज के लिए प्रेरणा का प्रकाश :
आज जब दुनिया मोबाइल स्क्रीन पर सिमटती जा रही है, तब कर्नाटक के एक साधारण किसान परिवार से निकले पद्म श्री अंके गौड़ा ने यह

गलती के लिए प्रायश्चित जरूरी :
अपूर्ण संसार की उपज होने के नाते हम सभी अपूर्ण हैं। हम सबने कोई-न-कोई गलती की है। कुछ बातों का हमें पश्चाताप होता है- वे