इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज

इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज

इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज आज बिना इन्टरनेट और कृत्रिम बुद्धि के जीवन की कल्पना करना असम्भव है। इन दोनों ने मिलकर सामान्य जीवन को पहले की तुलना में सरल कर दिया है। पहले जिन कामों में घण्टों लगा करते थे, वे अब एक क्लिक में हो जाते हैं। दैनिक…

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हनुमानजी

सेवा, समर्पण और संकल्प के जीवन्त प्रतीक हैं हनुमानजी

सेवा, समर्पण और संकल्प के जीवन्त प्रतीक हैं हनुमानजी भगवान हनुमानजी युवाओं के लिये एक अनुपम आदर्श और प्रेरणा स्रोत हैं। वे सेवा, समर्पण, संकल्प और निःस्वार्थ भावना के जीवन्त प्रतीक हैं। रामायण में वर्णित उनके जीवन की घटनाएँ आज के युवाओं को चुनौतियों से जूझने, लक्ष्यों को प्राप्त करने और एक सार्थक जीवन जीने…

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श्रीराम का कूटनीतिज्ञ स्वरूप

श्रीराम का कूटनीतिज्ञ स्वरूप

श्रीराम का कूटनीतिज्ञ स्वरूप प्रायः ये जनप्रवृत्ति रही है कि श्रीराम को सरल, करुणावत्सल और मर्यादा रक्षक व्यक्तित्व के रूप में देखा गया जो सदैव सामाजिक और राजनैतिक मर्यादाओं की रक्षा करते हैं जबकि श्रीकृष्ण को एक चतुर, कूटनीतिज्ञ और लीलाधर के रूप में देखा गया जो धर्मस्थापना के लिये साध्य साधन औचित्य की किसी…

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भारत का विभाजन : रक्त से रची गई एक लकीर

भारत का विभाजन : रक्त से रची गई एक लकीर

वह विभाजन जिसने उपमहाद्वीप का नक्शा बदल दिया ~ 1947 में भारत का बँटवारा सिर्फ़ एक नई सीमा रेखा खींचने से कहीं ज़्यादा था। यह इतिहास में ज़बरदस्ती किए गए सबसे बड़े और सबसे दर्दनाक विस्थापनों में से एक था, जिसने पंजाब, बंगाल, सिंध, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और कई अन्य इलाकों में लाखों लोगों की ज़िंदगी…

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विभाजन की विभीषिका – जब चार घंटे में लाहौर छोड़कर भागना पड़ा

विभाजन की विभीषिका – जब चार घंटे में लाहौर छोड़कर भागना पड़ा

14 अगस्त, 1947 का काला दिन भला कैसे कोई भूल सकता है. आज भी जैसे ही यह दिन आता है, अपने पुरखों की धरती, अपनी माटी, अपना गाँव, घर और अपनों को खोने का दर्द ताजा हो जाता है. 14 अगस्त, 1947 की आधी रात जब भारत आजाद हो रहा था, तब देश के एक…

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