पितृपक्ष और उसका महत्व

पितृपक्ष और उसका महत्व

पितृपक्ष और उसका महत्व पितृपक्ष… क्या आपने कभी सोचा है कि वर्ष में एक ऐसा पक्ष क्यों आता है, जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके लिए तर्पण करते हैं और श्राद्ध करते हैं? क्या यह केवल हजारों वर्षों से चली आ रही कोई धार्मिक परम्परा है, या इसके पीछे भी कोई कारण…

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भारतीय शिल्पकला के प्रणेता भगवान विश्वकर्मा

भारतीय शिल्पकला के प्रणेता भगवान विश्वकर्मा

भारतीय शिल्पकला के प्रणेता भगवान विश्वकर्मा अनेक पौराणिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा का उल्लेख प्राप्त होता है जिन्हें उत्कृष्ट वास्तु कला और भवनों का निर्माण करने के लिए जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के प्रथम शिल्पी, दिव्य वास्तुकार तथा निर्माण-कला के अधिष्ठाता देवता के रूप में सम्मान दिया जाता है।…

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राह दिखाते देवकीनन्दन

राह दिखाते देवकीनन्दन

राह दिखाते देवकीनन्दन भारत आज केवल आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति या वैश्विक प्रतिष्ठा की यात्रा पर नहीं है। वह अपनी आत्मा, अपनी स्मृति, अपनी सांस्कृतिक पहचान और अपने भविष्य को लेकर भी एक बड़े विमर्श के बीच खड़ा है इसलिये आज श्रीकृष्ण को केवल मन्दिर में खड़े बाँसुरीधारी देवता के रूप में देखना पर्याप्त नहीं…

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रक्षाबंधन

रक्षाबंधन: महत्व, पौराणिक कथाएँ, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि

रक्षाबंधन: महत्व, पौराणिक कथाएँ, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) केवल रेशम का एक धागा बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के पवित्र प्रेम, अटूट विश्वास और आजीवन रक्षा के संकल्प का सबसे बड़ा उत्सव है। संस्कृत में ‘रक्षा’ का अर्थ है सुरक्षा और ‘बंधन’ का अर्थ है बांधना। यह…

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सनातनी उत्सव और पर्यावरण

सनातनी उत्सव और पर्यावरण

भारतीय सनातन परम्परा में त्योहार केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि प्रकृति-चक्र, ऋतुओं और मानवीय जीवन के सामंजस्य के जीवन्त उदाहरण हैं। हरेला, रक्षा बन्धन, दिवाली, होली और तीज जैसे उत्सव पर्यावरण संरक्षण की प्राचीन भारतीय चेतना को दर्शाते हैं। इनमें से तीज का विशेष महत्व है क्योंकि यह सीधे मानसून, हरियाली और…

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