देवी ललिता त्रिपुर सुन्दरी

देवी ललिता त्रिपुर सुन्दरी

देवी ललिता त्रिपुर सुन्दरी चतुर्दश भुवनों में विद्यमान असंख्य जीवों की जननी देवी ललिता ही हैं। ललिता सहस्रनाम स्तोत्र के प्रथम श्लोक में भी प्रायः इसी अर्थ का प्रतिपादन किया गया है ॐ श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी श्रीमत्सिंहासनेश्वरी।चिदग्नि-कुण्ड-सम्भूता देवकार्य-समुद्यता ॥ अर्थात् देवी ललिता समस्त जीवों की माता तथा जगत् की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। वे चैतन्यरूप अग्निकुण्ड से…

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Eden Gardens में दुर्गा पूजा का ऐतिहासिक आगाज़: स्टेडियम में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

Eden Gardens में रचा गया इतिहास: स्टेडियम में धूमधाम से शुरू हुई दुर्गा पूजा

Eden Gardens में रचा गया इतिहास: स्टेडियम में धूमधाम से शुरू हुई दुर्गा पूजा 10-11 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स स्टेडियम में 3,000 ढाकियों की ताल और 3D ड्रोन शो के साथ दुर्गा पूजा का ऐतिहासिक आगाज़ हुआ। जानिए इस आयोजन की पूरी रिपोर्ट। कोलकाता का ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स स्टेडियम (Eden Gardens), जो…

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केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी शामिल करें

केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी करें शामिल

केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी शामिल करें बाबा केदारनाथ के दर्शन के बाद उत्तराखंड की आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाना चाहते हैं. तो आसपास के प्राचीन मंदिरों और तीर्थस्थलों को भी अपनी योजना में शामिल करें। कहीं शिव-पार्वती के विवाह की मान्यता जुड़ी है, तो कहीं देवी आराधना…

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धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा डॉ. बिपिन कुमार पाण्डेयशिक्षक, ज्योतिर्विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति विजय में नहीं, क्षमा में होती है; क्योंकि विजय केवल शत्रु को परास्त करती है, जबकि क्षमा शत्रुता का ही अंत कर देती है। जहाँ प्रतिशोध सभ्यता का अवसान करता है, वहीं क्षमा संस्कृति का उदय…

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पितृपक्ष की व्यवहारिक परम्परा

पितृपक्ष की व्यवहारिक परम्परा

पितृपक्ष की व्यवहारिक परम्परा मनुष्य जब अपने अस्तित्व की ओर दृष्टि डालता है, तब उसके सम्मुख एक स्वाभाविक प्रश्न उपस्थित होता है मैं कहाँ से आया हूँ? शंकराचार्य कहते हैं कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः… इस प्रश्न का उत्तर मनुष्य को अपने माता-पिता तक ले जाता है। माता-पिता से पूर्व वह अपने पितामह और मातामह तक…

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शांति की भारतीय धरोहर सारनाथ को वैश्विक प्रणाम !

शांति की भारतीय धरोहर सारनाथ को वैश्विक प्रणाम !

शांति की भारतीय धरोहर सारनाथ को वैश्विक प्रणाम ! भपवान बुद्ध की प्रथम उपदेश आपली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व बरोर सूची में शामिल किया जाना केवल एक पुरातात्विक स्थल की अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं बल्कि भारत की उस सनातन ज्ञान-परम्पका सम्मान है जिसने विश्व को शाति करुणा और मध्धाम मार्ग का संदेश दिया। दक्षिण कोरिया…

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क्या हवन से रोगों में मिल सकता है लाभ? जानिए ‘यज्ञ विज्ञान’ में बताई गई विशेष हवन सामग्री

क्या हवन से रोगों में मिल सकता है लाभ? जानिए ‘यज्ञ विज्ञान’ में बताई गई विशेष हवन सामग्री

क्या हवन से रोगों में मिल सकता है लाभ? जानिए ‘यज्ञ विज्ञान’ में बताई गई विशेष हवन सामग्री अगर, तगर, देवदारु, चन्दन, रक्त चन्दन, गूगुल, जायफल, लौंग, चिरायता, असगन्ध, यह दसों चीजें समान भाग में लेनी चाहिए। इसके साथ में विशेष रोग की विशेष औषधियाँ भी मिला लेनी चाहिए। तैयार औषधियों का दशवाँ भाग शर्करा…

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वामनावतार : शक्ति का संस्कार

वामनावतार : शक्ति का संस्कार

वामनावतार : शक्ति का संस्कार भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक चेतनत्त्व पटल पर भगवान वामन का स्वरूप केवल दशावतार रूपी परम्परा में एक धार्मिक दृष्टि तक ग्रहण करना उनके व्यक्तित्व की व्यापकता एवं विराटता को सीमित कर देना प्रतीत होता है। वामन अनुकृति के अन्तर्गत भारतीय मनीषियों ने स्व मेधा से सत्ता, सामर्थ्य, विनम्रता, आत्मसंयम एवं लोककल्याण…

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भारत माता मन्दिर की संकल्पना

भारत माता मन्दिर की संकल्पना

भारत माता मन्दिर की संकल्पना भारतीय सनातन परम्परा में संन्यास का उदेश्य बनविता याला की साधना का साथ-साथ लोक-कल्याण और राष्ट्र-धर्म का सम्वर्धन रहा है। आधुनिक युग में इस संन्यासी परम्परा को राष्ट्र-साधना के दिव्य अनुष्ठान में रूपान्तरित करने वाले मूर्धन्य मनीषियों में पद्मभूषण पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज का नाम अग्रगण्य है। स्वामी…

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सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक : गुग्गा जाहरवीर

सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक : गुग्गा जाहरवीर

सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक : गुग्गा जाहरवीर भारत के इतिहास में ऐसे अनेक योद्धा हुए जिन्होंने अपने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।ऐसे वीर योद्धाओं की विजय गाथा के किस्से आज भी हमारे समाज में लोकगीतों के माध्यम से गाए जाते हैं। ऐसे ही वीर योद्धा थे, ‘राणा गोगा…

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