पुस्तकालय की समाज में भूमिका

पुस्तकालय की समाज में भूमिका

पुस्तकालय की समाज में भूमिका आज का लोकतान्त्रक युग समतामूलक समाज की वकालत करता है जिसमे प्रत्येक मानव को अपने विकास एवं शिक्षा के लिये बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्रदान होना चाहिये तथा विभिन्य तरह की सूचनाओं का उपयोग मानवीय विकास के लिये बिना भेदभाव के होना चाहिये। पुस्तकालय द्वारा पुस्तकों एवं सूचनाओ…

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अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी : एक संक्षिप्त लेकिन प्रभावी जीवनी…

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में एक साधारण लेकिन संस्कारवान ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी संस्कृत के विद्वान थे और माता कृष्णा देवी गृहिणी थीं। बचपन से ही अटल जी में गहरी संवेदनशीलता, स्पष्टवादिता और राष्ट्रभक्ति के संस्कार पनप रहे थे। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने ग्वालियर…

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गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

यह एक महान गुरु की कथा है। उनका नाम महर्षि आश्वलायन था। उन्हें इस बात का गौरव था कि उनके द्वारा शिक्षित प्रत्येक विद्यार्थी राष्ट्र का प्रतिभाशाली, मेधावी और चरित्रवान नागरिक बना। उनके शिष्यों में मची प्रधानमंत्री, सेनापति, कुरुपद का कृषि-पंडित तथा अनेक प्रसिद्ध व्यक्ति सम्मिलित थे। एक दिन महर्षि को ज्ञात हुआ कि उनके…

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क्रान्तिवीर पं. राम प्रसाद बिस्मिल

काकोरी के क्रान्तिवीरों में पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल का नाम अग्रणी रूप से लिया जाता है। इनके पूर्वज मध्य प्रदेश के निवासी थे किन्तु इनका परिवार उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में आकर बस गया। रामप्रसाद बचपन में अत्यन्त चंचल स्वभाव के थे। उनका मन पढ़ायी में कम और खेल कूद में अधिक लगता था। उनकी…

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हाइपर कनेक्टिविटी’ के दौर में युवाओं पर गहराता अकेलापन

प्रो. संजय द्विवेदी सही मायनों में मानव सभ्यता के इतिहास में दुनिया इतनी कनेक्टेड कभी नहीं थी। एक क्लिक, एक संदेश और कुछ ही सेकेंड्स में सात समंदर पार बातचीत हो जाना किसी जादुई अहसास जैसा है। मोबाइल की चौबीस घंटे चमकती स्क्रीन ने इस जादुई दुनिया को हमारी हकीकत बना दिया है। लेकिन इस…

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