शिक्षा, राष्ट्रबोध और विकास पर मुस्लिम समाज के आत्ममंथन का समय

शिक्षा, राष्ट्रबोध और विकास पर मुस्लिम समाज के आत्ममंथन का समय

शिक्षा, राष्ट्रबोध और विकास पर मुस्लिम समाज के आत्ममंथन का समय भारत पर कब्जा करने के साथ ही अंग्रेजी हुकूमत ने तीन तरह के विषाक्त बीज बोये, जो आज देश के लिये दंश बन चुके हैं। पहले उन्होंने भारतीय संस्कृति पर अतिक्रमण करके शिक्षा व्यवस्था को तहस-नहस किया। फिर हरिजन वर्ग को सवर्ण समाज के…

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भारतरत्न चंडिकादास अमृतराव देशमुख 'नानाजी'

भारतरत्न चंडिकादास अमृतराव देशमुख ‘नानाजी’

भारतरत्न चंडिकादास अमृतराव देशमुख ‘नानाजी’ नानाजी देशमुख एक प्रख्यात समाज सुधारक थे जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दिया। नानाजी का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को शरद पूर्णिमा के दिन महाराष्ट्र के कडोली नामक ग्राम में एक मराठीभाषी देशस्थ ब्राह्मण परिवार में में हुआ था। आर्थिक अभाव मे बचपन में नानाजी ने अपनी…

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केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी शामिल करें

केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी करें शामिल

केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी शामिल करें बाबा केदारनाथ के दर्शन के बाद उत्तराखंड की आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाना चाहते हैं. तो आसपास के प्राचीन मंदिरों और तीर्थस्थलों को भी अपनी योजना में शामिल करें। कहीं शिव-पार्वती के विवाह की मान्यता जुड़ी है, तो कहीं देवी आराधना…

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अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर

अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर

अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर मनुष्य के जीवन में 60 वर्ष की आयु एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस उम्र के बाद नौकरी या व्यावसायिक उत्तरदायित्व कम हो सकते हैं, लेकिन व्यक्ति की सामाजिक उपयोगिता कम नहीं होती। इसके विपरीत, छह दशकों का अनुभव, ज्ञान, सम्पर्क, धैर्य और व्यवहारिक समझ समाज के लिये महत्वपूर्ण…

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ब्रह्मगुप्त : बीजगणित के पितामह

ब्रह्मगुप्त : बीजगणित के पितामह

ब्रह्मगुप्त : बीजगणित के पितामह आजादी के अमृत काल के पश्चात जब भारत अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष (२०४७) की ओर अग्रसर है, तब यह अनिवार्य है कि हम अपनी बौद्धिक संपदा का पुनर्मूल्यांकन करें, वैचारिक दास्तों से मुक्ति की ओर आगे बढ़ें। पश्चिम-केंद्रित दृष्टिकोण ने सदियों तक यह स्थापित करने का प्रयास किया कि…

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‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा मनमोहन वैद्य जी “वैष्णव जन तो तेणे रे कहिये, जे पीड़ पराई जाणे रे”। दूसरों की पीड़ा की अनुभूति कर उन्हें उस पीड़ा से मुक्त करने के सहज कर्म को ‘धर्म’ कहा गया है। राजा रंतिदेव का प्रसिद्ध वचन है – “मुझे न राज्य…

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जेन-जी का जनादेश

जेन-जी का जनादेश

जेन-जी का जनादेश विद्यार्थियों ने पुनः दिखा दिया कि वे राष्ट्रवाद के साथ हैं। प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली में हुए जेन-जी आन्दोलन को लेकर जो भ्रम फैलाया गया था, वह पूरी तरह साफ हो गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों, भिन्न-भिन्न प्रदेशों और सुदूरवर्ती अंचलों के अनेकानेक छात्र-छात्राएँ आकर शिक्षा…

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उम्र को मात: 96 साल के सत्यनारायण और 93 के नंदलाल की प्रेरणादायक कहानी

उम्र को मात: 96 साल के सत्यनारायण और 93 के नंदलाल की प्रेरणादायक कहानी

उम्र को मात: 96 की उम्र में नंगे पांव 16 किमी चलते हैं सत्यनारायण, 93 में भी 10 बीघे की खेती करते हैं नंदलाल सादगी, नियमित श्रम और सकारात्मक सोच के सहारे बुजुर्ग उम्र को मात दे रहे हैं। 96 वर्षीय सत्यनारायण चौहान रोज नंगे पांव करीब 16 किलोमीटर चलते हैं। वहीं 93 वर्षीय नंदलाल…

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सेवाज्ञ संस्थानम् : अँधेरे में जगमगाता एक दीपक

सेवाज्ञ संस्थानम् : अँधेरे में जगमगाता एक दीपक

सेवाज्ञ संस्थानम् : अँधेरे में जगमगाता एक दीपक लखनऊ। यदि मन में कुछ करने का संकल्प हो, लक्ष्य स्पष्ट और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो बिना संसाधनों के भी सफलता मिल सकती है। इस तथ्य को सत्य सिद्ध किया है सेवाज्ञ संस्थानम् के संस्थापक आशीष कुमार ‘आशु’ ने। सेवाज्ञ संस्थानम् सेवा के क्षेत्र में कार्य…

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क्या महिलाओं को अभी भी संघर्ष करना होगा ?

क्या महिलाओं को अभी भी संघर्ष करना होगा ?

क्या महिलाओं को अभी भी संघर्ष करना होगा ? भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नारी को सदैव शक्ति, सृजन और संस्कार का प्रतीक माना गया है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ का आदर्श हमारे समाज की आत्मा में बसता है। फिर भी वास्तविकता यह है कि महिलाओं को आज भी अपने सम्मान और समान…

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