भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक

भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक

भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक ।। सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलं अर्थः ।। भारत को प्रायः केवल अध्यात्म और दर्शन की भूमि कहा जाता है, परन्तु यह अर्धसत्य है। भारत आर्थिक चिन्तन की भी उतनी ही समृद्ध भूमि रहा है। आज से लगभग दो सहस्र वर्ष पूर्व आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य (कौटिल्य) ने ‘अर्थशास्त्र’…

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परम्परा, परिवर्तन और 'नवीन भारत' का उदय

परम्परा, परिवर्तन और ‘नवीन भारत’ का उदय

परम्परा, परिवर्तन और ‘नवीन भारत’ का उदय बौद्धिक सम्पदा (Intellectual Property) किसी भी राष्ट्र की वह अदृश्य किन्तु अत्यन्त प्रभावशाली शक्ति है, जो उसके आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी भविष्य को आकार देती है। यह केवल कानूनी शब्दावली भर नहीं है, बल्कि मानवीय मस्तिष्क की रचनात्मकता, शोध और नवाचार का जीवन्त परिणाम है, जिसे विधि द्वारा…

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