आत्मनिर्भर भारत * हिंदी भाषा का योगदान

आत्मनिर्भर भारत * हिंदी भाषा का योगदान

आत्मनिर्भर भारत * हिंदी भाषा का योगदान हिं दी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है अपितु यह भारत की आत्मा, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़ी भाषा है। यह करोड़ों भारतीयों को आपस में जोड़‌ने वाली भाषा है। आज जब भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है तब हिंदी सहित भारतीय भाषाओं…

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150 बार भारत आया विदेशी, बोलता है धाराप्रवाह हिन्दी-भोजपुरी

150 बार भारत आया विदेशी, बोलता है धाराप्रवाह हिन्दी-भोजपुरी

150 बार भारत आया विदेशी, बोलता है धाराप्रवाह हिन्दी-भोजपुरी 14 सितम्बर को मनाया जाने वाला हिन्दी दिवस केवल हिन्दी के उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय भाषायी विविधता, सांस्कृतिक सह-अस्तित्व और अपनी भाषायी विरासत पर विचार करने का दिन भी है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिन्दी को संघ की…

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भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता

भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता

भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता भारत जैसे बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय देश में किसी भी भाषा की भूमिका मात्र संप्रेषण तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह संस्कृति, समाज, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना की वाहक भी बन जाती है। हिंदी, भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्राचीन और अत्यंत समृद्ध भाषा के रूप में, देश की सामूहिक स्मृति,…

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समृद्धतम् भाषा संस्कृत

समृद्धतम् भाषा संस्कृत

समृद्धतम् भाषा संस्कृत ।। भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा ।। भारत की दो ही प्रतिष्ठा है, संस्कृत और संस्कृति। संस्कृत एक महान और समृद्ध भाषा है, जिसका सम्बन्ध विभिन्न क्षेत्रों से है। यह भारतीय संस्कृति और धर्म की आधारशिला है, जिसमें वेद-वेदांग, पुराण, उपनिषद्, श्रीमद्भगवद्गीता जैसे अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गये हैं। संस्कृत…

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