भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक
भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक ।। सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलं अर्थः ।। भारत को प्रायः केवल अध्यात्म और दर्शन की भूमि कहा जाता है, परन्तु यह अर्धसत्य है। भारत आर्थिक चिन्तन की भी उतनी ही समृद्ध भूमि रहा है। आज से लगभग दो सहस्र वर्ष पूर्व आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य (कौटिल्य) ने ‘अर्थशास्त्र’…