अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर

अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर

अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर मनुष्य के जीवन में 60 वर्ष की आयु एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस उम्र के बाद नौकरी या व्यावसायिक उत्तरदायित्व कम हो सकते हैं, लेकिन व्यक्ति की सामाजिक उपयोगिता कम नहीं होती। इसके विपरीत, छह दशकों का अनुभव, ज्ञान, सम्पर्क, धैर्य और व्यवहारिक समझ समाज के लिये महत्वपूर्ण…

Read More
भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक

भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक

भारतीय अर्थचिन्तन : कौटिल्य से डिजिटल तक ।। सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलं अर्थः ।। भारत को प्रायः केवल अध्यात्म और दर्शन की भूमि कहा जाता है, परन्तु यह अर्धसत्य है। भारत आर्थिक चिन्तन की भी उतनी ही समृद्ध भूमि रहा है। आज से लगभग दो सहस्र वर्ष पूर्व आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य (कौटिल्य) ने ‘अर्थशास्त्र’…

Read More
इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज

इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज

इंटरनेट, एआई और सोशल मीडिया के मकड़जाल में फँसता समाज आज बिना इन्टरनेट और कृत्रिम बुद्धि के जीवन की कल्पना करना असम्भव है। इन दोनों ने मिलकर सामान्य जीवन को पहले की तुलना में सरल कर दिया है। पहले जिन कामों में घण्टों लगा करते थे, वे अब एक क्लिक में हो जाते हैं। दैनिक…

Read More
सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी मनुष्य के जीवन में सच्ची भक्ति का फल केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि आत्मिक शांति, ईश्वर का सान्निध्य और जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त करना होता है। इतिहास, पुराण और संत साहित्य ऐसे अनेक प्रसंगों से भरे पड़े हैं, जो बताते हैं कि निष्कपट…

Read More
परम्परा, परिवर्तन और 'नवीन भारत' का उदय

परम्परा, परिवर्तन और ‘नवीन भारत’ का उदय

परम्परा, परिवर्तन और ‘नवीन भारत’ का उदय बौद्धिक सम्पदा (Intellectual Property) किसी भी राष्ट्र की वह अदृश्य किन्तु अत्यन्त प्रभावशाली शक्ति है, जो उसके आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी भविष्य को आकार देती है। यह केवल कानूनी शब्दावली भर नहीं है, बल्कि मानवीय मस्तिष्क की रचनात्मकता, शोध और नवाचार का जीवन्त परिणाम है, जिसे विधि द्वारा…

Read More