गन्ने से बनी 'बायोडिग्रेडेबल' पानी बोतल

गन्ने से बनी ‘बायोडिग्रेडेबल’ पानी बोतल

गन्ने से बनी ‘बायोडिग्रेडेबल’ पानी बोतल प्लास्टिक आज हमारी जिन्दगी का हिस्सा बन चुका है। बाजार से सामान लाने से लेकर पानी पीने तक, हर जगह प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा नुकसान पर्यावरण को उठाना पड़ रहा है। प्लास्टिक की बोतलें नदियों, समुद्र, झीलों और बैकवॉटर में पहुँचकर लम्बे समय तक…

Read More
विक्रम-1

‘विक्रम-1’ की उड़ान से उपजा नया विश्वास

‘विक्रम-1’ की उड़ान से उपजा नया विश्वास 18 जुलाई 2026 भारत के अन्तरिक्ष इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ, क्योंकि इसी दिन दोपहर 12 बजकर 05 मिनट पर आन्ध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र से स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित ‘विक्रम-1’ रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया गया। यह केवल…

Read More
IIT Bhubaneshwar

IIT भुवनेश्वर की खोज बदल सकती है इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया

IIT भुवनेश्वर की खोज बदल सकती है इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया महज तीन परमाणुओं जितनी मोटी परत और उसके भीतर ऐसा दुर्लभ चुंबकीय गुण, जो भविष्य के कंप्यूटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा स्टोरेज और क्वांटम तकनीक की दिशा बदलने की क्षमता रखता है। IIT भुवनेश्वर के वैज्ञानिकों ने अमेरिका की वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ…

Read More

तारों की खोज ने रचा इतिहास

अंतरिक्ष विज्ञान के वैश्विक मंच पर भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। प्रसिद्ध भारतीय खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘COSPAR विक्रम साराभाई मेडल’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान प्राप्त करने वाली वह पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक बन गई हैं। इटली के फ्लोरेंस शहर में…

Read More

डिजिटल क्रांति का ‘मेक इन इंडिया’ अवतार: कैसे पूरी दुनिया पर छा रहा है हमारा UPI?

जब बात टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की आती है, तो भारत अब सिर्फ एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर पथ-प्रदर्शन करने वाला देश बन चुका है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है UPI (Unified Payments Interface) एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) की दूरदर्शी नीतियों के चलते भारत का यह स्वदेशी पेमेंट सिस्टम अब सिर्फ आपकी पसंदीदा…

Read More

हाइड्रोजन ट्रेन : भारतीय रेल के हरित भविष्य का उद्घोष

विकास वही है जो प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करे।’ इक्कीसवीं सदी का यही मूल मंत्र आज विश्व की विकास-नीतियों का आधार बन चुका है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण और जीवाश्म ईंधनों पर अत्यधिक निर्भरता ने मानव सभ्यता को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ विकास और पर्यावरण के बीच सन्तुलन स्थापित करना…

Read More