
सेवाज्ञ संस्थानम् : अँधेरे में जगमगाता एक दीपक
लखनऊ। यदि मन में कुछ करने का संकल्प हो, लक्ष्य स्पष्ट और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो बिना संसाधनों के भी सफलता मिल सकती है। इस तथ्य को सत्य सिद्ध किया है सेवाज्ञ संस्थानम् के संस्थापक आशीष कुमार ‘आशु’ ने। सेवाज्ञ संस्थानम् सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहा एक संगठन है जो असहाय लोगों की सेवा करने के लिए सदैव तत्पर रहता है। जहाँ भी अवसर मिला वहाँ पर असहाय लोगों का संबल बनकर खड़ा हो गया सेवाज्ञ संस्थानम्। तन-मन-धन से सहायता कर निर्बल लोगों की आँखों के आँसू पोंछ, उनके चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेरना ही इसके कार्यकर्ताओं का लक्ष्य है।
सहज ही प्रश्न उठता है, सेवाज्ञ संस्थानम् कहाँ, कब से और क्या कर रहा है? इसका उत्तर है- सेवाज्ञ संस्थानम् काशी में २३ जनवरी, २०१८ से कार्य कर रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य है, युवा पीढ़ी में भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति जिज्ञासा जागृत करना। आशीष कहते हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सम्पर्क के दौरान मन में यह विचार आया कि युवा पीढ़ी में सनातन संस्कृति को लेकर जो प्रश्न उठते हैं, उनका तार्किक और शास्त्रयुक्त समाधान नहीं हो पाता है। इसका परिणाम यह होता है कि ऐसे युवक भटक जाते हैं। कभी-कभी वे अपना रास्ता भी बदल लेते हैं। ऐसे में सनातन धर्म के प्रति उनकी अवधारणा को स्पष्ट करने के लिए कोई उचित मंच हो इसलिए युवा धर्म संसद के आयोजन का विचार उत्पन्न हुआ। पहली बार २०१६ में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में युवा धर्म संसद का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानन्द से प्रेरित यह आयोजन ११ से १६ सितम्बर के मध्य आयोजित किया गया। इसी समय निर्णय किया गया कि युवा धर्म संसद भारतवर्ष की सात मोक्षदा नगरियों में आयोजित किया जायेगा। इस लक्ष्य को सामने रखकर २०१६ में काशी, २०२२ में अयोध्या, २०२३ में मथुरा, २०२४ में हरिद्वार और २०२५ में कांची में आयोजन किया गया। २०२६ में ११ से १६ सितम्बर तक उज्जैन में यह आयोजन किया जायेगा। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत उपस्थित रहेंगे। इसके बाद द्वारिका में युवा धर्म संसद का आयोजन किया जायेगा। इसके बाद निर्णय किया जायेगा कि अगला आयोजन कहाँ किया जाये। युवा धर्म संसद में २४ राज्यों के छात्र शामिल होते रहे हैं। विशेष बात यह है कि स्वामी विवेकानन्द से प्रेरित यह आयोजन प्रति वर्ष ११ से १६ सितम्बर के मध्य ही आयोजित किया जाता है। लेकिन क्या यह इतना आसान था ? आशीष कहते हैं, बिल्कुल नहीं। बार-बार ऐसे क्षण आये, जब लगा, अब कुछ नहीं हो सकेगा। हिम्मत ने जवाब दे दिया। निराशा हावी हो गयी। लगातार मिल रही उपेक्षा ने मन को कुण्ठित कर दिया तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक का संबल मिला। उन्होंने समझाया, उत्साह बढ़ाया और लक्ष्य प्राप्ति के लिए फिर से जुटने को तैयार किया। आशीष कहते हैं- प्रचारक महोदय न होते, तो यह सब संभव नहीं था। इससे यह बात प्रमाणित होती है कि निराशा के दलदल में फँसे व्यक्ति को उचित मार्गदर्शन और प्रेरणा देकर बड़ा लक्ष्य उपलब्ध किया जा सकता है।
भावनात्मक संबल पाकर आशीष नयी ऊर्जा, नये उत्साह से फिर अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए सक्रिय हो उठे। सेवाज्ञ संस्थानम् का कार्यक्षेत्र बढ़ने लगा। पहचान बनने लगी। जिन्होंने कभी आशीष को मिलने के लिए समय नहीं दिया था, वही लोग उनकी निष्ठा, लगन और समर्पण को देखकर हर संभव सहायता करने के लिए तत्पर हो उठे।
सेवाज्ञ संस्थानम् ने युवा छात्रों को अवसाद से मुक्ति दिलाने के लिए उत्तिष्ठ भारत योजना प्रारम्भ की। इसका उद्देश्य छात्रों में चरित्र निर्माण, कॅरियर के लिए मार्गदर्शन देना भी था। आज यह देश के १३ राज्यों के १८ विश्वविद्यालयों में सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। यहाँ छात्रों को बताया जाता है कि एक छात्र के निर्माण में माता-पिता के साथ ही शिक्षकों, समाज का भी योगदान रहता है। इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनके प्रति कृतज्ञ रहें। समय-समय पर विश्वविद्यालयों में गोष्ठियों के माध्यम से छात्रों को विशेषज्ञों की सहायता भी उपलब्ध करायी जाती है।
महामना महोत्सव
सेवाज्ञ संस्थानम् प्रतिवर्ष भारत रत्न महामना पं. मदनमोहन मालवीय की जयन्ती के उपलक्ष्य में ६० से ज्यादा महाविद्यालयों में प्रतियोगिताओं का आयोजन कराता है। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी में अपनी संस्कृति, परम्परा, ज्ञान, मूल्यों एवं महामना के विचारों के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके अन्तर्गत गीता-पाठ, सूर्य-नमस्कार, निबन्ध, काव्य-पाठ, चित्रकला, दौड़-प्रश्नोत्तरी, भाषण की प्रतियोगिताएँ करायी जाती हैं।
सेवा-कार्य
कोविड के दौरान सेवाज्ञ संस्थानम् के सेवाव्रती कार्यकर्ताओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों को भोजन-वितरण का कार्य किया। कार्यकर्ताओं की सेवाभावना देखकर उन्हें सहयोग करने के लिए जन सामान्य ने भी आगे बढ़कर अपना योगदान किया। कोविड की दूसरी लहर के दौरान काशी के जिलाधिकारी के सहयोग से सेवाज्ञ संस्थानम् ने पाँच अस्पतालों में भोजन और आयुर्वेदिक काढ़ा का वितरण किया।
वेद विद्यालय
काशी के मैदागिन में गुरुकुल का संचालन किया जा रहा है। इसमें २७ बच्चे निःशुल्क शिक्षा, भोजन, आवास की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। मिर्जापुर के चुनार में २१ बीघा जमीन पर गुरुकुल, गोशाला चलाने की योजना पर कार्य हो रहा है। शीघ्र ही यह योजना फलवती होगी।
छत्तीसगढ़ के मरवाही जिले में मरवाही जनजातीय समूह में तीन वर्ष से शिक्षा-कार्य किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि यह समूह शिक्षा-संस्कारों से बहुत दूर था। सेवाज्ञ संस्थानम् के प्रयासों से यहाँ के बच्चे अब स्कूल जा रहे हैं। मोहल्ले की साफ-सफाई की व्यवस्था उचित तरीके से संचालित हो रही है। यहाँ की बिटिया सरस्वती ने नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। काशी की मुसहर बस्ती में भी सेवाकार्य व्यापक स्तर पर संचालित किये जा रहे हैं। इसके अन्तर्गत सबको सरकारी सुविधाओं का लाभदिलाना, भारतीय पर्व-त्यौहार मनाना, बच्चों को शिक्षित-संस्कारित करने का कार्य किया जा रहा है।
पर्यावरण-संरक्षण
इसके अन्तर्गत १५ हजार से ज्यादा वृक्ष लगाये गये हैं। अकेले छत्तीसगढ़ में ही १० हजार वृक्ष लगाये गये हैं। वृक्ष लगाने के बाद वृक्षमित्र को जिम्मेदारी दे दी जाती है कि वह अपने वृक्ष की रक्षा करे।