अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर

अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर

अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर : आप किसी अभिनेता या अभिनेत्री को याद करेंगे तो क्यों करेंगे, उनकी बेहतरीन एक्टिंग, उनकी खूबसूरती, उनके डायलॉग्स या फिर उनको मिलने वाले अवार्ड्स के लिये लेकिन सिनेमा जगत में एक ऐसा भी अभिनेता था जिसे यह देश उनकी देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के लिये याद करेगा,…

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हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी

हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी

हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी : कैप्टन स्मित मच्छार : लहूलुहान शरीर, अडिग हौसला और 174 जिन्दगियों की रक्षा की जंग एक मुस्लिम कट्टरपंथी पायलट हमास अल हमामी के आतंकी प्रयास को असफल करने वाले फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार का साहस भारतीयों की सदियों से चली आ रही साहसी वीरगाथाओं का एक…

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डॉ. कलाम: मिसाइल मैन से 'जनता के राष्ट्रपति' तक की अमर गाथा

डॉ. कलाम: मिसाइल मैन से ‘जनता के राष्ट्रपति’ तक की अमर गाथा

यदि भारत के इतिहास में किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश की जाए जिसने अपनी कड़ी मेहनत, सादगी और दूरदर्शिता से करोड़ों युवाओं की जिंदगी बदल दी, तो सबसे पहला नाम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) का आता है। उन्हें प्यार से ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ (Missile Man of India) और ‘जनता के…

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विचारक दत्तोपन्त ठेंगड़ी

विचारक दत्तोपन्त ठेंगड़ी

विचारक दत्तोपन्त ठेंगड़ी किसी भी राष्ट्र का निर्माण से लेकर उसका वर्तमान और भविष्य युवाओं के हाथों में होता है। भारत जैसा राष्ट्र में, जहाँ दुनिया का सबसे ज्यादा युवाओं की संख्या है, यह बात और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। दत्तोपन्त ठेंगड़ी के विचारों में युवा केवल भविष्य की उम्मीद नहीं, बल्कि वर्तमान की…

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शिक्षा, राष्ट्रबोध और विकास पर मुस्लिम समाज के आत्ममंथन का समय

शिक्षा, राष्ट्रबोध और विकास पर मुस्लिम समाज के आत्ममंथन का समय

शिक्षा, राष्ट्रबोध और विकास पर मुस्लिम समाज के आत्ममंथन का समय भारत पर कब्जा करने के साथ ही अंग्रेजी हुकूमत ने तीन तरह के विषाक्त बीज बोये, जो आज देश के लिये दंश बन चुके हैं। पहले उन्होंने भारतीय संस्कृति पर अतिक्रमण करके शिक्षा व्यवस्था को तहस-नहस किया। फिर हरिजन वर्ग को सवर्ण समाज के…

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भारतरत्न चंडिकादास अमृतराव देशमुख 'नानाजी'

भारतरत्न चंडिकादास अमृतराव देशमुख ‘नानाजी’

भारतरत्न चंडिकादास अमृतराव देशमुख ‘नानाजी’ नानाजी देशमुख एक प्रख्यात समाज सुधारक थे जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दिया। नानाजी का जन्म 11 अक्टूबर 1916 को शरद पूर्णिमा के दिन महाराष्ट्र के कडोली नामक ग्राम में एक मराठीभाषी देशस्थ ब्राह्मण परिवार में में हुआ था। आर्थिक अभाव मे बचपन में नानाजी ने अपनी…

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केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी शामिल करें

केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी करें शामिल

केदारनाथ यात्रा के बाद उत्तराखंड में इन 5 आध्यात्मिक जगहों को भी शामिल करें बाबा केदारनाथ के दर्शन के बाद उत्तराखंड की आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाना चाहते हैं. तो आसपास के प्राचीन मंदिरों और तीर्थस्थलों को भी अपनी योजना में शामिल करें। कहीं शिव-पार्वती के विवाह की मान्यता जुड़ी है, तो कहीं देवी आराधना…

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अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर

अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर

अनुभव को राष्ट्रसेवा में बदलने का अवसर मनुष्य के जीवन में 60 वर्ष की आयु एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस उम्र के बाद नौकरी या व्यावसायिक उत्तरदायित्व कम हो सकते हैं, लेकिन व्यक्ति की सामाजिक उपयोगिता कम नहीं होती। इसके विपरीत, छह दशकों का अनुभव, ज्ञान, सम्पर्क, धैर्य और व्यवहारिक समझ समाज के लिये महत्वपूर्ण…

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ब्रह्मगुप्त : बीजगणित के पितामह

ब्रह्मगुप्त : बीजगणित के पितामह

ब्रह्मगुप्त : बीजगणित के पितामह आजादी के अमृत काल के पश्चात जब भारत अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष (२०४७) की ओर अग्रसर है, तब यह अनिवार्य है कि हम अपनी बौद्धिक संपदा का पुनर्मूल्यांकन करें, वैचारिक दास्तों से मुक्ति की ओर आगे बढ़ें। पश्चिम-केंद्रित दृष्टिकोण ने सदियों तक यह स्थापित करने का प्रयास किया कि…

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‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा

‘मैं’ से ‘हम’ तक : सेवा और धर्म की भारतीय अवधारणा मनमोहन वैद्य जी “वैष्णव जन तो तेणे रे कहिये, जे पीड़ पराई जाणे रे”। दूसरों की पीड़ा की अनुभूति कर उन्हें उस पीड़ा से मुक्त करने के सहज कर्म को ‘धर्म’ कहा गया है। राजा रंतिदेव का प्रसिद्ध वचन है – “मुझे न राज्य…

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