गोवत्स द्वादशी

गोवत्स द्वादशी

गोवत्स द्वादशी : भारतीय संस्कृति में पर्व एवं उत्सव जीवन के आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को वंशानुक्रम से प्रवाहित करने के सशक्त माध्यम रहे हैं। इन पर्वो का महत्त्व धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उन जीवन के आदर्शों में भी निहित है, जिन्हें वे समाज के समक्ष प्रतिष्ठित करते हैं। गोवत्स द्वादशी ऐसा ही पर्व…

Read More
संस्कृति और सभ्यता

संस्कृति और सभ्यता

संस्कृति और सभ्यता : ‘संस्कृति’ और ‘सभ्यता’ इन दो शब्दों के मूलार्थ ही उनके सही अर्थ को विशद करते हैं। ‘संस्कृति’ शब्द ‘सम्कृ’ यानी ‘सम’ उपसर्गयुक्त ‘कृ’ धातु से बना है। इस धातु का अर्थ जब, अच्छा करना, योग्य करना, भूषित करना होता है, तब व्याकरण के नियम के अनुसार संस्कृति में ‘स्’ यह वर्ण…

Read More
संस्कृत साहित्य में जल-जीवन सौंदर्य

संस्कृत साहित्य में जल-जीवन सौंदर्य

संस्कृत साहित्य में जल-जीवन सौंदर्य : प्रकृति के जीवनदायी उपादानों के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने में कविमन आदिकाल से भावाकुल और संवेदनशील रहा है। इन उपादानों में भी कवियों को सर्वाधिक प्रभावित किया नदियों और जलस्रोतों ने, जिन्हें कवियों ने ईश्वर के धरती पर बहते हुए साक्षात् वरदान की तरह माना। नदियों को देखते,…

Read More
आदि कवि महर्षि वाल्मीकि

आदि कवि महर्षि वाल्मीकि

आदि कवि महर्षि वाल्मीकि महर्षि वाल्मीकि भारत की उन विरली विभूतियों में से एक हैं जिनकी उपस्थिति पूरे देश में है और सभी सामाजिक स्वरूप में मान्यता है। हर समाज के लिये वे आदर्श है। अनुसूचित जनजाति भील समाज उन्हें अपना पूर्वज मानता है तो अनुसूचित समाज में एक उप वर्ग स्वयं को उनका वंशज…

Read More
प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा

प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा

प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा : प्रमुख महिला स्वाधीनता संग्राम सेनानी मातंगिनी हाजरा का जन्म एक अत्यन्त गरीब बंगाली परिवार में हुआ था। तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार किसान परिवार की इस बेटी का विवाह मात्र 12 वर्ष की आयु में त्रिलोचन हाजरा से हुआ और 18 वर्ष की अवस्था तक पहुँचते ही…

Read More
शक्ति उपासना का पर्व विजयादशमी

शक्ति उपासना का पर्व विजयादशमी

शक्ति उपासना का पर्व विजयादशमी : भारतीय समाज प्रकृति उपासक है। प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को हम पर्व के रूप में मनाते है। इन पर्वो का सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व है तथा मनुष्य को सत्य आचरण की प्रेरणा देना भी है। जिनमें विजयादशमी का अपना विशेष महत्त्व है। जो असत्य पर सत्य की…

Read More
विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना

विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना

विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : संगठन, शक्ति और साधना डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे भारतीय परंपरा में विजयादशमी का पर्व केवल राम की रावण पर विजय का स्मरण नहीं है, बल्कि यह सत्य पर असत्य की, धर्म पर अधर्म की और संगठन पर बिखरी हुई शक्ति की विजय का प्रतीक है। श्रीगुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर)…

Read More
अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर

अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर

अभिनेता से बढ़कर सच्चे इंसान थे नाना पाटेकर : आप किसी अभिनेता या अभिनेत्री को याद करेंगे तो क्यों करेंगे, उनकी बेहतरीन एक्टिंग, उनकी खूबसूरती, उनके डायलॉग्स या फिर उनको मिलने वाले अवार्ड्स के लिये लेकिन सिनेमा जगत में एक ऐसा भी अभिनेता था जिसे यह देश उनकी देशभक्ति और राष्ट्रसेवा के लिये याद करेगा,…

Read More
हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी

हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी

हिन्दू की उपस्थिति, सुरक्षा की गारण्टी : कैप्टन स्मित मच्छार : लहूलुहान शरीर, अडिग हौसला और 174 जिन्दगियों की रक्षा की जंग एक मुस्लिम कट्टरपंथी पायलट हमास अल हमामी के आतंकी प्रयास को असफल करने वाले फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार का साहस भारतीयों की सदियों से चली आ रही साहसी वीरगाथाओं का एक…

Read More
डॉ. कलाम: मिसाइल मैन से 'जनता के राष्ट्रपति' तक की अमर गाथा

डॉ. कलाम: मिसाइल मैन से ‘जनता के राष्ट्रपति’ तक की अमर गाथा

यदि भारत के इतिहास में किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश की जाए जिसने अपनी कड़ी मेहनत, सादगी और दूरदर्शिता से करोड़ों युवाओं की जिंदगी बदल दी, तो सबसे पहला नाम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam) का आता है। उन्हें प्यार से ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ (Missile Man of India) और ‘जनता के…

Read More