संस्कृति और सभ्यता

संस्कृति और सभ्यता

संस्कृति और सभ्यता : ‘संस्कृति’ और ‘सभ्यता’ इन दो शब्दों के मूलार्थ ही उनके सही अर्थ को विशद करते हैं। ‘संस्कृति’ शब्द ‘सम्कृ’ यानी ‘सम’ उपसर्गयुक्त ‘कृ’ धातु से बना है। इस धातु का अर्थ जब, अच्छा करना, योग्य करना, भूषित करना होता है, तब व्याकरण के नियम के अनुसार संस्कृति में ‘स्’ यह वर्ण…

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वामनावतार : शक्ति का संस्कार

वामनावतार : शक्ति का संस्कार

वामनावतार : शक्ति का संस्कार भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक चेतनत्त्व पटल पर भगवान वामन का स्वरूप केवल दशावतार रूपी परम्परा में एक धार्मिक दृष्टि तक ग्रहण करना उनके व्यक्तित्व की व्यापकता एवं विराटता को सीमित कर देना प्रतीत होता है। वामन अनुकृति के अन्तर्गत भारतीय मनीषियों ने स्व मेधा से सत्ता, सामर्थ्य, विनम्रता, आत्मसंयम एवं लोककल्याण…

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भारत माता मन्दिर की संकल्पना

भारत माता मन्दिर की संकल्पना

भारत माता मन्दिर की संकल्पना भारतीय सनातन परम्परा में संन्यास का उदेश्य बनविता याला की साधना का साथ-साथ लोक-कल्याण और राष्ट्र-धर्म का सम्वर्धन रहा है। आधुनिक युग में इस संन्यासी परम्परा को राष्ट्र-साधना के दिव्य अनुष्ठान में रूपान्तरित करने वाले मूर्धन्य मनीषियों में पद्मभूषण पूज्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज का नाम अग्रगण्य है। स्वामी…

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सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक : गुग्गा जाहरवीर

सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक : गुग्गा जाहरवीर

सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक : गुग्गा जाहरवीर भारत के इतिहास में ऐसे अनेक योद्धा हुए जिन्होंने अपने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा में अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया।ऐसे वीर योद्धाओं की विजय गाथा के किस्से आज भी हमारे समाज में लोकगीतों के माध्यम से गाए जाते हैं। ऐसे ही वीर योद्धा थे, ‘राणा गोगा…

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