गोवत्स द्वादशी

गोवत्स द्वादशी

गोवत्स द्वादशी : भारतीय संस्कृति में पर्व एवं उत्सव जीवन के आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को वंशानुक्रम से प्रवाहित करने के सशक्त माध्यम रहे हैं। इन पर्वो का महत्त्व धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उन जीवन के आदर्शों में भी निहित है, जिन्हें वे समाज के समक्ष प्रतिष्ठित करते हैं। गोवत्स द्वादशी ऐसा ही पर्व…

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संस्कृति और सभ्यता

संस्कृति और सभ्यता

संस्कृति और सभ्यता : ‘संस्कृति’ और ‘सभ्यता’ इन दो शब्दों के मूलार्थ ही उनके सही अर्थ को विशद करते हैं। ‘संस्कृति’ शब्द ‘सम्कृ’ यानी ‘सम’ उपसर्गयुक्त ‘कृ’ धातु से बना है। इस धातु का अर्थ जब, अच्छा करना, योग्य करना, भूषित करना होता है, तब व्याकरण के नियम के अनुसार संस्कृति में ‘स्’ यह वर्ण…

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ब्रह्म मुहूर्त में उठने की परम्परा क्यों ?

ब्रह्म मुहूर्त में उठने की परम्परा क्यों ?

ब्रह्म मुहूर्त में उठने की परम्परा क्यों ? रात्रि के अन्तिम प्रहर के तत्कालबाद का समय को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिये सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति…

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संस्कृत साहित्य में जल-जीवन सौंदर्य

संस्कृत साहित्य में जल-जीवन सौंदर्य

संस्कृत साहित्य में जल-जीवन सौंदर्य : प्रकृति के जीवनदायी उपादानों के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने में कविमन आदिकाल से भावाकुल और संवेदनशील रहा है। इन उपादानों में भी कवियों को सर्वाधिक प्रभावित किया नदियों और जलस्रोतों ने, जिन्हें कवियों ने ईश्वर के धरती पर बहते हुए साक्षात् वरदान की तरह माना। नदियों को देखते,…

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