
विष्णुहरि शिलालेख से प्राचीन स्तम्भ तक
अयोध्या। रामलला के दर्शन के साथ अब श्रद्धालु रामजन्मभूमि के पुरातात्विक इतिहास से भी रूबरू हो सकेंगे। राम कथा संग्रहालय में रामजन्मभूमि परिसर की खोदायी और निर्माण के दौरान मिले 216 पुरावशेषों को संरक्षित कर प्रदर्शित करने की तैयारी है। इनमें विष्णुहरि शिलालेख, स्थापत्य अवशेष, प्रतिमाओं के खण्ड और विभिन्न कालखण्डों के सिक्के शामिल हैं।
रामजन्मभूमि परिसर में अलग-अलग चरणों की खोदाई के दौरान करीब 300 पुरावशेष सुरक्षित किये गये हैं। इनमें से 88 पहले से राम कथा संग्रहालय के पास हैं, जबकि 128 मन्दिर परिसर में सुरक्षित बताए जा रहे हैं। संग्रहालय निदेशक डॉ. संजीव सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र भेजकर इन 128 पुरावशेषों को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। शेष अवशेषों को मन्दिर परिसर में ही प्रदर्शित करने की योजना है।
शिलालेख से स्तम्भ आधार तक दिखेगा इतिहास
प्रस्तावित गैलरी में करीब 50 स्तम्भ आधार, कसौटी और लाल बलुआ पत्थर के स्तम्भ, प्राचीन शिवलिंग, पिलास्टर, चौखट, लिंटल और ब्रैकेट जैसे वास्तु अवशेष शामिल होंगे। अमलक, घट-पल्लव, कीर्तिमुख और कमल आकृति वाले नक्काशीदार पत्थर भी प्रदर्शित किये जायेंगे। मानव-पशु आकृतियों वाली टेराकोटा वस्तुएँ, खिलौने, मनके और विभिन्न कालों के सिक्के भी संग्रह का हिस्सा होंगे। विष्णुहरि शिलालेख प्रमुख आकर्षण होगा, जिसे 11वीं-12वीं शताब्दी की नागरी लिपि से सम्बंधित बताया जाता है। संग्रहालय में पुरावशेषों के साथ उनके पुरातात्विक सन्दर्भ की जानकारी भी दी जायेगी।