भारत सबसे भरोसेमंद मददगार

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नेपाल आपदा : चार विमानों से 68.5 टन सामग्री पहुंची, टीमें भी युद्धस्तर पर जुटीं

पड़ोसी ही नहीं, मित्र भी वही जो मुश्किल घड़ी में साथ खड़ा हो। नेपाल में ग्लेशियर ढहने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच भारत इसी भावना से ओतप्रोत उसके साथ खड़ा है। राहत और बचाव अभियान में भारत ने अब तक चार विमानों से करीब 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। रविवार को पहुंचा चौथा विमान 11 टन से अधिक जरूरी सामान लेकर काठमांडू पहुंचा। राहत सामग्री के साथ भारत ने चिकित्सा, सुरंग बचाव और फोरेंसिक विशेषज्ञों की अतिरिक्त टीमें भी भेजी हैं। नेपाल ने भी माना है कि भारत की मानवीय मदद ने आपदा से जूझ रहे लोगों का हौसला बढ़ाया है। आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नेपाल में मृतकों की संख्या 788 पहुंच गई है। त्रिशूली नदी में दोबारा बाढ़ आने से गोरखा जिले में 130 मीटर लंबा सस्पेंशन पुल बह गया। लगातार बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने से राहत और बचाव अभियान में भी मुश्किलें बढ़ रही हैं।


रायटर के अनुसार, बाढ़ और भूस्खलन से रसुवा और नुवाकोट में नौ हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन इन नेपाल (आइपीपीएएन) के अनुसार, इन परियोजनाओं में काम कर रहे 898 लोग लापता थे, जिनमें से 361 को सुरक्षित निकाला जा चुका है और 537 अब भी लापता हैं। मलबे और कीचड़ से सुरंगें जाम हैं। इन्हें खोलने के लिए नेपाल सेना के करीब 10,000 जवान लगाए गए हैं। त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में फंसे करीब 40 लोगों को निकालने के लिए भारत ने 11 सदस्यीय सुरंग बचाव विशेषज्ञ दल भेजा है। भारतीय सेना का 22 सदस्यीय दल भी अभियान में जुटा है। चीन की छह सदस्यीय सुरंग विशेषज्ञ टीम भी अपर त्रिशूली उबी परियोजना में बचाव का रास्ता तलाश रही है।


प्रेट्र के अनुसार, भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम डीएनए जांच व अन्य फोरेंसिक प्रक्रियाओं में मदद कर रही है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने रविवार को भारतीय टीम से मुलाकात कर अभियान की आगे की रणनीति पर चर्चा की।


भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, रविवार तक नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। रसुवा की एक जलविद्युत परियोजना में फंसे चार भारतीयों को शनिवार को बाहर निकाल लिया गया था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक 403 भारतीय तिब्बत से नेपाल पहुंच चुके हैं और बाकी भारतीयों से संपर्क बना हुआ है। तिब्बती अधिकारियों के अनुसार 261 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं, जिनमें 49 भारतीय शामिल हैं।

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से वित्तीय मदद की अपील की है। अमेरिका ने अब तक 36 लाख डालर और करीब 10 हजार परिवारों के लिए आपात खाद्य सहायता दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने करीब 1.5 लाख डालर की मदद के साथ चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराई है। श्रीलंका ने 10 लाख डालर की मदद का वादा किया है।

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