IIT भुवनेश्वर की खोज बदल सकती है इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया

IIT Bhubaneshwar
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IIT भुवनेश्वर की खोज बदल सकती है इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया

महज तीन परमाणुओं जितनी मोटी परत और उसके भीतर ऐसा दुर्लभ चुंबकीय गुण, जो भविष्य के कंप्यूटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा स्टोरेज और क्वांटम तकनीक की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।


IIT भुवनेश्वर के वैज्ञानिकों ने अमेरिका की वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक अत्यंत पतले द्विआयामी पदार्थ में दुर्लभ चुंबकीय अवस्था की सैद्धांतिक भविष्यवाणी की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध भविष्य में मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तुलना में कहीं छोटे, तेज और कम बिजली खर्च करने वाले उपकरण विकसित करने का रास्ता खोल सकता है।


इस शोध के केंद्र में आयरन ट्राइक्लोराइड यानी FeCl, की एकल परत है. जिसकी मोटाई केवल तीन परमाणुओं के बराबर है। वैज्ञानिक गणनाओं में इस पदार्थ में ‘आई वेव अल्टरमैग्नेटिज्म नाम की अत्यंत दुर्लभ चुंबकीय अवस्था मिलने का अनुमान लगाया गया है। अल्टरमैग्नेटिज्म भौतिक विज्ञान का अपेक्षाकृत नया क्षेत्र है, जिसमें सामान्य चुंबक और प्रति-लौहचुंबकीय पदार्थों के कुछ उपयोगी गुण एक साथ मिलते हैं।
शोध का नेतृत्व ॥ भुवनेश्वर के भौतिकी विभाग के डॉ. मनीष कुमार मोहंता ने किया है। इसके निष्कर्ष नैनो विज्ञान और नैनो तकनीक की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘नैनो लेटर्स’ में प्रकाशित किए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस पदार्थ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका कुल चुंबकीय प्रभाव लगभग शून्य होने के बावजूद इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार में विशेष प्रकार का विभाजन दिखाई देता है। यही गुण भविष्य की अत्यंत सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के लिए इसे उपयोगी बना सकता है।


आज के सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मुख्यतः इलेक्ट्रॉन के विद्युत आवेश का इस्तेमाल सूचना भेजने और संसाधित करने के लिए करते हैं। इसके विपरीत भविष्य की स्पिन्ट्रॉनिक्स तकनीक इलेक्ट्रॉन के ‘स्पिन’ गुण का भी इस्तेमाल करती है। इससे सूचना को अधिक तेजी से संसाधित करने और कम ऊर्जा में अधिक काम करने की संभावना पैदा होती है। ॥ भुवनेश्वर की टीम द्वारा अध्ययन किया गया पदार्थ स्पिन-घुवित विद्युत धाराओं को उत्पन्न और नियंत्रित करने की क्षमता दिखाता है।


इसकी दूसरी बड़ी विशेषता पारंपरिक चुंबकों की एक बड़ी समस्या को दूर करने की संभावना है। सामान्य चुंबकीय पदार्थ अपने आसपास अवांछित चुंबकीय क्षेत्र पैदा करते हैं। बहुत छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इससे पास-पास लगे घटक एक दूसरे के काम में हस्तक्षेप कर सकते हैं। लेकिन अल्टरमैग्नेटिक पदार्थ लगभग कोई बाहरी मटका हुआ चुंबकीय क्षेत्र पैदा नहीं करते। इसका अर्थ है कि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक घटकों को और अधिक पास-पास रखकर छोटे आकार में ज्यादा क्षमता वाले उपकरण बनाए जा सकते हैं।


शोध में इस पदार्थ में महत्वपूर्ण स्पिन हॉल और एनोमलस हॉल प्रभाव भी मिलने का अनुमान है। ये गुण उन्नत इलेक्ट्रॉनिक परिपथों में इलेक्ट्रॉन के स्पिन को नियंत्रित करने और सूचना के कुशल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि प्रयोगशाला में इन परिणामों की पुष्टि होती है तो यह उच्च क्षमता वाली मेमोरी, स्पिन आधारित ट्रांजिस्टर और अत्यंत तेज संचार प्रणालियों के विकास में उपयोगी हो सकता है।
इसके संभावित उपयोगों का दायरा काफी बड़ा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इससे डेटा स्टोरेज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के हार्डवेयर, पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, टेराहर्ट्ज संचार, उच्च गति कंप्यूटिंग और क्वांटम सूचना तकनीक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विशाल डेटा केंद्रों की बढ़ती बिजली खपत से जूझ रही है, कम ऊर्जा में अधिक कंप्यूटिंग क्षमता देने वाली तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।


हालांकि इस उपलब्धि को अभी बाजार में इस्तेमाल के लिए तैयार नई तकनीक समझना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिकों ने FeCl, की तीन-परमाणु मोटी परत के इन गुणों की सैद्धांतिक गणनाओं के आधार पर भविष्यवाणी की है। अगला महत्वपूर्ण चरण प्रयोगशाला में पदार्थ तैयार करके इन चुंबकीय गुणों की वास्तविक पुष्टि करना होगा। शोधकर्ताओं ने भी स्पष्ट किया है कि व्यावहारिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने से पहले प्रयोगात्मक परीक्षण जरूरी हैं। फिर भी भुवनेश्वर की यह खोज महत्वपूर्ण है। जिस दुनिया में अधिक शक्तिशाली कंप्यूटर बनाने का अर्थ लगातार अधिक ऊर्जा खपत होता जा रहा है. वहां केवल तीन परमाणुओं की मोटाई वाला पदार्थ यदि तेज गति, बेहद छोटे आकार और कम ऊर्जा खपत वाले इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार बनता है, तो यह भविष्य की कंप्यूटिंग तकनीक के लिए एक बड़ी छलांग साबित हो सकती है।

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