स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानन्द : नर-सेवा ही नारायण-सेवा का मूर्त स्वरूप

स्वामी विवेकानन्द : नर-सेवा ही नारायण-सेवा का मूर्त स्वरूप सदियों से हमारे उपनिषद् हमें ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का सन्देश देते आ रहे हैं। परन्तु समय के साथ इस अगाध ज्ञान का व्यावहारिक रूप कहीं लुप्त सा हो गया था। धर्म केवल कर्मकांडों एवं छुआछूत तक सीमित रह गया था। ऐसे काल में बंगाल की…

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