भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता
भाषा, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता भारत जैसे बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और बहुजातीय देश में किसी भी भाषा की भूमिका मात्र संप्रेषण तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह संस्कृति, समाज, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना की वाहक भी बन जाती है। हिंदी, भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्राचीन और अत्यंत समृद्ध भाषा के रूप में, देश की सामूहिक स्मृति,…