स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानन्द : नर-सेवा ही नारायण-सेवा का मूर्त स्वरूप

स्वामी विवेकानन्द : नर-सेवा ही नारायण-सेवा का मूर्त स्वरूप सदियों से हमारे उपनिषद् हमें ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का सन्देश देते आ रहे हैं। परन्तु समय के साथ इस अगाध ज्ञान का व्यावहारिक रूप कहीं लुप्त सा हो गया था। धर्म केवल कर्मकांडों एवं छुआछूत तक सीमित रह गया था। ऐसे काल में बंगाल की…

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राह दिखाते देवकीनन्दन

राह दिखाते देवकीनन्दन

राह दिखाते देवकीनन्दन भारत आज केवल आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति या वैश्विक प्रतिष्ठा की यात्रा पर नहीं है। वह अपनी आत्मा, अपनी स्मृति, अपनी सांस्कृतिक पहचान और अपने भविष्य को लेकर भी एक बड़े विमर्श के बीच खड़ा है इसलिये आज श्रीकृष्ण को केवल मन्दिर में खड़े बाँसुरीधारी देवता के रूप में देखना पर्याप्त नहीं…

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