
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज के समय में परिवार के साथ समय बिताना और आपसी संवाद बनाये रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान माता पिता को स्वयं करना चाहिये। इसके लिये उन्हें अपना ज्ञान लगातार बढ़ाते रहना होगा, क्योंकि बच्चे उपदेश से अधिक अपने माता-पिता के व्यवहार और आचरण से सीखते हैं।
डॉ. भागवत विश्वमांगल्य सभा द्वारा डॉ. आम्बेडकर अन्तरराष्ट्रीय केन्द्र में आयोजित 12 ‘युगानुकूल मातृत्व’ विषयक प्रबोधन बैठक के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज में कई बार जानबूझकर भ्रम फैलाये जाते हैं। भारतीय संस्कृति के बारे में भी लम्बे समय तक गलत धारणाएँ बनायी गयीं, जबकि हमारी संस्कृति और परम्पराएँ अत्यन्त समृद्ध एवं सशक्त हैं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी एकता सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों से है इसलिये बिना सोचे-समझे विदेशी जीवनशैली अपनाने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के अनुरूप परिवार और समाज व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। कार्यक्रम में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 900 से अधिक प्रबुद्ध मातृशक्ति ने भाग लिया।