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जेन-जी का जनादेश

जेन-जी का जनादेश

जेन-जी का जनादेश विद्यार्थियों ने पुनः दिखा दिया कि वे राष्ट्रवाद के साथ हैं। प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली में हुए जेन-जी आन्दोलन को लेकर जो भ्रम फैलाया गया था, वह पूरी तरह साफ हो गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों, भिन्न-भिन्न प्रदेशों और सुदूरवर्ती अंचलों के अनेकानेक छात्र-छात्राएँ आकर शिक्षा…

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उम्र को मात: 96 साल के सत्यनारायण और 93 के नंदलाल की प्रेरणादायक कहानी

उम्र को मात: 96 साल के सत्यनारायण और 93 के नंदलाल की प्रेरणादायक कहानी

उम्र को मात: 96 की उम्र में नंगे पांव 16 किमी चलते हैं सत्यनारायण, 93 में भी 10 बीघे की खेती करते हैं नंदलाल सादगी, नियमित श्रम और सकारात्मक सोच के सहारे बुजुर्ग उम्र को मात दे रहे हैं। 96 वर्षीय सत्यनारायण चौहान रोज नंगे पांव करीब 16 किलोमीटर चलते हैं। वहीं 93 वर्षीय नंदलाल…

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सेवाज्ञ संस्थानम् : अँधेरे में जगमगाता एक दीपक

सेवाज्ञ संस्थानम् : अँधेरे में जगमगाता एक दीपक

सेवाज्ञ संस्थानम् : अँधेरे में जगमगाता एक दीपक लखनऊ। यदि मन में कुछ करने का संकल्प हो, लक्ष्य स्पष्ट और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो बिना संसाधनों के भी सफलता मिल सकती है। इस तथ्य को सत्य सिद्ध किया है सेवाज्ञ संस्थानम् के संस्थापक आशीष कुमार ‘आशु’ ने। सेवाज्ञ संस्थानम् सेवा के क्षेत्र में कार्य…

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क्या महिलाओं को अभी भी संघर्ष करना होगा ?

क्या महिलाओं को अभी भी संघर्ष करना होगा ?

क्या महिलाओं को अभी भी संघर्ष करना होगा ? भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नारी को सदैव शक्ति, सृजन और संस्कार का प्रतीक माना गया है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ का आदर्श हमारे समाज की आत्मा में बसता है। फिर भी वास्तविकता यह है कि महिलाओं को आज भी अपने सम्मान और समान…

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धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा

धर्म का द्वितीय लक्षण : क्षमा डॉ. बिपिन कुमार पाण्डेयशिक्षक, ज्योतिर्विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति विजय में नहीं, क्षमा में होती है; क्योंकि विजय केवल शत्रु को परास्त करती है, जबकि क्षमा शत्रुता का ही अंत कर देती है। जहाँ प्रतिशोध सभ्यता का अवसान करता है, वहीं क्षमा संस्कृति का उदय…

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पितृपक्ष और उसका महत्व

पितृपक्ष और उसका महत्व

पितृपक्ष और उसका महत्व पितृपक्ष… क्या आपने कभी सोचा है कि वर्ष में एक ऐसा पक्ष क्यों आता है, जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके लिए तर्पण करते हैं और श्राद्ध करते हैं? क्या यह केवल हजारों वर्षों से चली आ रही कोई धार्मिक परम्परा है, या इसके पीछे भी कोई कारण…

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भारत की पहली एलएनजी-चालित ट्रेन का शुभारंभ: एक ऐतिहासिक कदम

भारत की पहली एलएनजी-चालित ट्रेन का शुभारंभ: एक ऐतिहासिक कदम

भारत की पहली एलएनजी-चालित ट्रेन का शुभारंभ: एक ऐतिहासिक कदम केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के ऐतिहासिक साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी-चालित (Liquefied Natural Gas – LNG) ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।…

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एकात्म मानवदर्शन केवल भारत नहीं, समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शक – दत्तात्रेय होसबाले जी

एकात्म मानवदर्शन केवल भारत नहीं, समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शक – दत्तात्रेय होसबाले जी

एकात्म मानवदर्शन केवल भारत नहीं, समस्त मानवता के लिए मार्गदर्शक – दत्तात्रेय होसबाले जी जयपुर, 25 सितंबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारत को भारत बनाने की जीवन दृष्टि दी और इसे केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि विश्व के लिए मार्गदर्शन एवं मॉडल…

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सरदार भगत सिंह का राष्ट्र चिन्तन

सरदार भगत सिंह का राष्ट्र चिन्तन

सरदार भगत सिंह का राष्ट्र चिन्तन सरदार भगत सिंह भारत, भारतीयता और संराष्ट्रभाव के सम्वाहक थे। राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत भगत सिंह भारतीय ज्ञान, दर्शन और अध्यात्म से प्रेरित थे। श्रीमद्भगवत गीता, वेदों का ज्ञान, भगत सिंह की लेखनी और व्यवहार दोनों में परिलक्षित होता है। हालाँकि कुछ मार्क्सवादी इतिहासकार आलोचक और चिन्तकों ने यह…

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