
ईसाई बनाने भारत आया पादरी, बन गया हिन्दू
आरएसएस की गतिविधियाँ समझने आये थे भारत, हिन्दू दर्शन से प्रभावित हो अपनाया सनातन धर्म, बने डॉ. सुमन
लखनऊ। इण्डोनेशिया के जकार्ता से ईसाई मिशनरी गतिविधियों के सिलसिले में भारत आये रॉबर्ट सोलोमन की जिन्दगी यहाँ आने के बाद बदल गई। ईसाई पादरी के रूप में भारत आए सोलोमन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों और हिन्दू दर्शन से प्रभावित हुए। वर्ष 1986 में उन्होंने ईसाई धर्म छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाया और डॉ. सुमन कुमार नाम रखा।
1984 में पहुँचे भारत
दैनिक जागरण में 13 जुलाई 2021 को प्रकाशित साक्षात्कार के अनुसार, सोलोमन जकार्ता के रहने वाले थे। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में शोध किया था। इसी दौरान वे ईसाई पादरी और मिशनरी गतिविधियों से जुड़े। करीब 1982 से उनका भारत आना शुरू हुआ। वर्ष 1984 में 25 वर्ष की उम्र में उन्हें आरएसएस की गतिविधियों को समझने के लिये भारत भेजे जाने की बात उन्होंने साक्षात्कार में बतायी थी।
उरई में संघ शाखा से बढ़ा सम्पर्क
उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के उरई में उनके आवास के पास आरएसएस की शाखा स्वयंसेवकों के काम को करीब से समझा। इस लगती थी। वे शाखा में जाने लगे और दौरान उनकी मुलाकात तत्कालीन क्षेत्र प्रचारक जयगोपाल, स्वतंत्र देव सिंह और प्रचारक ओंकार भावे से हुई। हिन्दी न आने के कारण भाषा चुनौती बनी। ओंकार भावे ने उन्हें संघ और भारतीय विचार से जुड़ी अंग्रेजी किताबें दीं। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द की पुस्तकों का भी अध्ययन किया।
संघ को लेकर बदली धारणा
सुमन कुमार के अनुसार, संघ कार्यकर्ताओं के अनुशासन, सेवा गतिविधियों और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके दृष्टिकोण को देखकर उनकी पूर्व धारणाएँ बदलने लगीं। उन्होंने मिशनरी संगठन को भेजी रिपोर्ट में भी अपने अनुभव साझा किये।
हिन्दू धर्म अपनाकर बने पूर्णकालिक प्रचारक
वर्ष 1986 में उन्होंने आर्य समाज की पद्धति से हिन्दू धर्म अपनाया और डॉ. सुमन कुमार नाम देखा। इसी वर्ष के पूर्णकालिक प्रचारक बने और हिन्दू जागरण मंच की जिम्मेदारी सम्भाली। कानपुर के बाद वर्ष 2000 में उन्हें अवध प्रान्त का संगठन मंत्री बनाया गया। वर्ष 2004 में उन्हें झारखण्ड भेजा गया, जहाँ उन्होंने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में संगठन विस्तार और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों पर काम किया।