जानिए क्यों 40% टैक्स देने के बाद भी फिनलैंड है दुनिया का सबसे खुशहाल देश

जानिए क्यों 40% टैक्स देने के बाद भी फिनलैंड है दुनिया का सबसे खुशहाल देश
जानिए क्यों 40% टैक्स देने के बाद भी फिनलैंड है दुनिया का सबसे खुशहाल देश

जानिए क्यों 40% टैक्स देने के बाद भी फिनलैंड है दुनिया का सबसे खुशहाल देश

आज के दौर में जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऊंचे करों को जनता पर एक बोझ की तरह देखता है, वहीं उत्तर-पूर्वी यूरोप का एक छोटा सा देश फिनलैंड इस धारणा को पूरी तरह से झुठलाता है। संयुक्त राष्ट्र की ‘वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट’ में लगातार आठ वर्षों से दुनिया का सबसे खुशहाल देश चुना जाना कोई इत्तेफाक नहीं है। यह नतीजा है एक ऐसी पारदर्शी और कल्यानकारी सामाजिक व्यवस्था का, जहाँ नागरिक टैक्स चुकाने में कतराते नहीं, बल्कि गर्व महसूस करते हैं।
सवाल उठता है कि आखिर फिनलैंड ऐसा क्या अलग कर रहा है? इसका जवाब छिपा है वहाँ की उस व्यवस्था में, जहाँ आम नागरिक की 40 प्रतिशत तक की कमाई टैक्स में जाने के बावजूद, बदले में उसे जो मिलता है, वह उसकी जिंदगी को बेफिक और खुशहाल बना देता है।


टैक्स नहीं, यह तो खुशहाली का निवेश है

विकासशील हो या विकसित, दुनिया के अधिकांश देशों में जनता का सबसे बड़ा तनाव यही होता है कि बीमारी के वक्त अस्पताल का भारी-भरकम बिल कैसे भरेगा या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए लोन कहाँ से मिलेगा। फिनलैंड ने अपने नागरिकों को इसी सबसे बड़े मानसिक तनाव से मुक्त कर दिया है।


फिनलैंड की सरकार नागरिक की कुल कमाई का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा टैक्स के रूप में लेती है। लेकिन बदले में मिलने वाली जनसुविधाएँ इतनी पुख्ता हैं कि किसी भी व्यक्ति को अपनी जेब से अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
मुफ्त और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं: फिनलैंड में इलाज कराना किसी अमीर या गरीब के बीच का फर्क खत्म कर देता है। यहाँ का हेल्थकेयर सिस्टम सरकार द्वारा पूरी तरह वित्तपोषित है। चाहे कोई साधारण फ्लू हो या बड़ी से बड़ी सर्जरी, नागरिक बिना किसी वित्तीय चिंता के विश्वस्तरीय इलाज का लाभ उठाते हैं।


मुफ्त और समान शिक्षाः फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली दुनिया भर में आदर्श मानी जाती है। यहाँ प्राथमिक स्कूल से लेकर मेडिकल, इंजीनियरिंग और पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा पूरी तरह मुफ्त है। निजी और सरकारी स्कूलों के बीच कोई भेदभाव नहीं है हर बच्चे को एक समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है।


सस्ता और आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट फिनलैंड के शहरों में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली इतनी सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित कि लोग अपनी निजी गाड़ियों की जगह बसों और ट्रेनों में सफर करना पसंद करते हैं। यह न केवल आम जनता की जेब पर बोझ कम है करता है, बल्कि पर्यावरण को भी शुद्ध रखता है।


जब राष्ट्रपति से मिलना हो चाय पर चर्चा जितना सहज

फिनलैंड की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी वहाँ का ‘सामाजिक विश्वास’ और वीआईपी कल्वर का खत्म होना है। अन्य देशों में जहाँ राष्ट्र प्रमुखों और बड़े राजनेताओं के इर्द-गिर्द अभेद्य सुरक्षा का घेरा होता है और आम जनता का उन तक पहुँचना नामुमकिन सा लगता
है, फिनलैंड में स्थिति बिल्कुल उलट है। यहाँ का राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री आम नागरिकों की तरह सड़कों पर टहलता या कॉफी शॉप में बैठा मिल सकता है। यहाँ कोई भी साधारण नागरिक देश के राष्ट्रपति से मुलाकात कर सकता है, अपनी समस्या सीधे उनके सामने रख सकता है और सबसे खास बात यह कि उन समस्याओं का समाधान कागजों में नहीं, बल्कि धरातल पर होता है। यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही ही है जो सरकार और जनता के बीच के फासले को खत्म कर देती है।


सादगी, समानता और प्रकृति का संतुलन

फिनलैंड के लोग अपनी धन-दौलत का दिखावा करने में विश्वास नहीं रखते। वहाँ एक उद्योगपति और एक साधारण कर्मचारी दोनों एक ही सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं और एक ही तरह के माहौल में रहते हैं। ‘समानता’ ही फिनलैंड की असली ताकत है। इसके अलावा, फिनलैंड के लोग प्रकृति के बहुत करीब हैं। कम प्रदूषण, स्वच्छ हवा, विशाल जंगल और साफ झीलें उनकी मानसिक शांति को बढ़ाती हैं। जब नागरिक को अपनी बुनियादी जरूरतों रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य की चिंता नहीं होती, तो वह अपना पूरा ध्यान रचनात्मकता, परिवार और समाज की भलाई में लगाता है।


दुनिया के लिए एक सबक

फिनलैंड ने दुनिया के तमाम देशों को यह सिखाया है कि ‘खुशहाली’ किसी देश की जीडीपी (GDP) से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह देश अपने सबसे कमजोर नागरिक की कितनी देखभाल करता है।
हाई-टैक्स मॉडल अगर भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी हो, तो वह जनता का शोषण नहीं, बल्कि उसका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन जाता है। फिनलैंड का 40 प्रतिशत टैक्स मॉडल एक ऐसा सौदा है. जहाँ नागरिक अपनी कमाई का एक हिस्सा देकर जीवन भर की बेफिक्री, सुरक्षा और आत्मसम्मान खरीदता है। शायद यही वजह है कि बर्फ से ढके इस देश के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्कुराते हैं।

विनोद टण्डन

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