राह दिखाते देवकीनन्दन

राह दिखाते देवकीनन्दन

राह दिखाते देवकीनन्दन भारत आज केवल आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति या वैश्विक प्रतिष्ठा की यात्रा पर नहीं है। वह अपनी आत्मा, अपनी स्मृति, अपनी सांस्कृतिक पहचान और अपने भविष्य को लेकर भी एक बड़े विमर्श के बीच खड़ा है इसलिये आज श्रीकृष्ण को केवल मन्दिर में खड़े बाँसुरीधारी देवता के रूप में देखना पर्याप्त नहीं…

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सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी

सच्ची भक्ति का फल: ईश्वर के दर्शन की प्रेरणादायक कहानी मनुष्य के जीवन में सच्ची भक्ति का फल केवल सांसारिक सुख प्राप्त करना नहीं होता, बल्कि आत्मिक शांति, ईश्वर का सान्निध्य और जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त करना होता है। इतिहास, पुराण और संत साहित्य ऐसे अनेक प्रसंगों से भरे पड़े हैं, जो बताते हैं कि निष्कपट…

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श्रीराम का कूटनीतिज्ञ स्वरूप

श्रीराम का कूटनीतिज्ञ स्वरूप

श्रीराम का कूटनीतिज्ञ स्वरूप प्रायः ये जनप्रवृत्ति रही है कि श्रीराम को सरल, करुणावत्सल और मर्यादा रक्षक व्यक्तित्व के रूप में देखा गया जो सदैव सामाजिक और राजनैतिक मर्यादाओं की रक्षा करते हैं जबकि श्रीकृष्ण को एक चतुर, कूटनीतिज्ञ और लीलाधर के रूप में देखा गया जो धर्मस्थापना के लिये साध्य साधन औचित्य की किसी…

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समृद्धतम् भाषा संस्कृत

समृद्धतम् भाषा संस्कृत

समृद्धतम् भाषा संस्कृत ।। भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा ।। भारत की दो ही प्रतिष्ठा है, संस्कृत और संस्कृति। संस्कृत एक महान और समृद्ध भाषा है, जिसका सम्बन्ध विभिन्न क्षेत्रों से है। यह भारतीय संस्कृति और धर्म की आधारशिला है, जिसमें वेद-वेदांग, पुराण, उपनिषद्, श्रीमद्भगवद्गीता जैसे अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गये हैं। संस्कृत…

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