पितृपक्ष की व्यवहारिक परम्परा
पितृपक्ष की व्यवहारिक परम्परा मनुष्य जब अपने अस्तित्व की ओर दृष्टि डालता है, तब उसके सम्मुख एक स्वाभाविक प्रश्न उपस्थित होता है मैं कहाँ से आया हूँ? शंकराचार्य कहते हैं कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः… इस प्रश्न का उत्तर मनुष्य को अपने माता-पिता तक ले जाता है। माता-पिता से पूर्व वह अपने पितामह और मातामह तक…