गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा
गुरु के त्याग और शिक्षा की प्रेरक कथा

यह एक महान गुरु की कथा है। उनका नाम महर्षि आश्वलायन था। उन्हें इस बात का गौरव था कि उनके द्वारा शिक्षित प्रत्येक विद्यार्थी राष्ट्र का प्रतिभाशाली, मेधावी और चरित्रवान नागरिक बना। उनके शिष्यों में मची प्रधानमंत्री, सेनापति, कुरुपद का कृषि-पंडित तथा अनेक प्रसिद्ध व्यक्ति सम्मिलित थे। एक दिन महर्षि को ज्ञात हुआ कि उनके ही एक शिष्य देवदत्त के क्रूर और अत्याचारी कार्यों से सम्पूर्ण कुरुपद में त्राहि-त्राहि हुई है। यह समाचार सुनकर वे गहरे आत्मिक दुःख और ग्लानि से भर उठे। सेनापति भी देवदत्त को पकड़ने में असफल थे।

भीषण वर्षा की रात थी। बादलों की गर्जना, घना अंधकार और भयावह वातावरण था। ऐसे समय भी महर्षि ने अपने पथभ्रष्ट शिष्य को समझाने का संकल्प लिया। अनेक लोगों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, किन्तु वे नहीं रुके। जंगलों में भटकते हुए अंततः वे उस स्थान पर पहुंच गए, जहां देवदत्त अपने साथियों के साथ डेरा डाले हुए था। अंधेरे में किसी की आहट पाकर देवदत्त ने ललकारा, “रुक जाओ, नहीं तो मैं खड्ग से प्रहार कर दूंगा!” परन्तु आगन्तुक नहीं रुका। देवदत्त ने अपना खड्ग चला दिया, जो सीधे महर्षि के मस्तक में जा धंसा। रक्त की धार फूट पड़ी। उसी क्षण आकाश में बिजली कौंधी और उसके प्रकाश में देवदत्त ने देखा कि जिसके ऊपर उसने प्रहार किया है, वे उसके पूज्य गुरुदेव हैं। यह दृश्य देखते ही वह उनके चरणों में गिर पड़ा और विलाप करते हुए बोला, “गुरुदेव! यह आपने क्या किया?” महर्षि ने अंतिम सांसों में धीमे स्वर में कहा, “वत्स, ऐसा प्रतीत होता है कि मेरी शिक्षा में कहीं न कहीं कमी रह गई थी। उसी कमी का दण्ड मुझे मिल गया।”

गुरु के इन वचनों ने देवदत्त के हृदय को झकझोर दिया। उसे अपनी भूल का गहरा पश्चाताप हुआ। उसी दिन उसने अपराध और डकैती का मार्ग सदा के लिए त्याग दिया तथा सदाचार का जीवन अपनाया। महर्षि आश्वलायन ने अपने प्राणों का बलिदान देकर अपने शिष्य को सच्ची शिक्षा दी। भारतीय गुरु-परम्परा का यह आदर्श उदाहरण हमें बताता है कि एक सच्चा गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अपने जीवन का भी बलिदान देकर शिष्य के जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। धन्य है भारत की ऐसी महान गुरु-परम्परा, जिसने त्याग, करुणा, कर्तव्य और आत्मबलिदान के सर्वोच्च आदर्श स्थापित किए।

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