ईसाई मतान्तरण का मकड़जाल

ईसाई मतान्तरण
ईसाई मतान्तरण

ईसाई मतान्तरण का मकड़जाल

लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील के एक गाँव से शुरू हुई मतान्तरण की जाँच ने जैसे-जैसे परतें खोलीं, इसकी कड़ियाँ लखनऊ से निकलकर तमिलनाडु और केरल तक जुड़ती चली गयीं। मामला केवल प्रार्थना सभाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जाँच में आर्थिक मदद, इलाज, रोजगार, बच्चों की पढ़ायी और दूसरी जरूरतों के बहाने लोगों से सम्पर्क बनाने के आरोप भी सामने आये। स्थानीय स्तर पर तैयार किये गये सम्पर्कों के जरिये लोगों को जोड़ने और फिर उन्हें धार्मिक गतिविधियों तक ले जाने की बात जाँच में सामने आयी। सबसे चौंकाने वाली कड़ी यह रही कि इस पूरे नेटवर्क में दक्षिण भारत से आने वाले लोगों और कथित फण्डिंग की भूमिका की भी पड़ताल शुरू हो गयी है।


जाँच में हुए कई खुलासे

मामले का खुलासा 22 जुलाई को मोहनलालगंज के भरसवाँ गाँव में हुआ। यहाँ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग गाँव में आकर लोगों को प्रार्थना सभा में शामिल होने और धर्म बदलने के लिये प्रेरित कर रहे हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने जाँच शुरू की। इसी दौरान 23 जुलाई को तमिलनाडु से आये सात लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार लोगों में कथित गिरोह का प्रमुख डेनियल, उसकी पत्नी सुबला और स्थानीय स्तर पर जुड़े अन्य लोग शामिल हैं। विभिन्न रिपोर्टों में डेनियल का मूल नाम बाला सुब्रमण्यम बताया गया है और उसका सम्बन्ध तमिलनाडु से है। पुलिस पूछताछ में उसके वर्ष 1998 में लखनऊ आने और बाद में धार्मिक प्रचार से जुड़ने की जानकारी सामने आयी।
जाँच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर धार्मिक साहित्य, मतान्तरण सम्बन्धी बुकलेट, बैंक स्टेटमेंट, एक डायरी और बोलेरो वाहन मिला। इन सामानों को जाँच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अब डायरी और बैंक लेनदेन से उन लोगों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है, जिनका इस नेटवर्क से सीधा या परोक्ष सम्बन्ध है।


तमिलनाडु से प्रचार के लिये भेजा गया लखनऊ

डेनियल मूल रूप से तमिलनाडु का रहने वाला था। किशोरावस्था में एक ईसाई युवती से सम्पर्क और बाद में विवाह के बाद उसने धर्म परिवर्तन किया। इसके बाद वह धार्मिक गतिविधियों से जुड़ गया। वर्ष 1998 में डेनियल और उसकी पत्नी को चर्च की ओर से लखनऊ भेजा गया था। कुछ समय बाद उसे वाराणसी सर्किल में धार्मिक प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दिये जाने की बात भी सामने आयी। इसके बाद कथित तौर पर उसने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सम्पर्क बढ़ाया। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक व्यक्ति के लखनऊ आने से शुरू हुआ सम्पर्क धीरे-धीरे स्थानीय लोगों तक पहुँचा और फिर अलग-अलग इलाकों में प्रार्थना सभाओं के जरिये नेटवर्क बढ़ने की बात सामने आयी। पुलिस की जाँच अब इसी कड़ी को जोड़ने में लगी है।


प्रशिक्षण देने केरल से आती थी टीम

पुलिस जाँच में सामने आया कि स्थानीय लोगों को मतान्तरण के लिये तैयार करने और यहाँ मौजूद सम्पकों को आगे की गतिविधियों के लिये प्रशिक्षण देने के लिये केरल से टीम लखनऊ आती थी। पुलिस इस पहलू की भी जाँच कर रही है कि बाहर से आने वाले लोग कितने समय के लिये लखनऊ आते थे, वे किन लोगों के सम्पर्क में रहते थे और किन गाँवों या इलाकों में जाते थे।


जरूरतमन्द परिवारों पर फोकस

गिरोह कथित तौर पर ऐसे परिवारों की तलाश करता था, जो आर्थिक रूप से कमजोर हों। इनमें बीमार लोगों, इलाज करा रहे परिवार, रोजगार की तलाश करने वाले और आर्थिक संकट से गुजर रहे लोग शामिल है। पहले मदद की पेशकश और उसके बाद धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने का आरोप लगाया गया है। पुलिस जाँच में कई मामलों में लोगों के घर जाकर आर्थिक सहायता देने, इलाज में मदद करने या शादी आदि के लिए रुपये देने की बात सामने आयी है। जरूरतमन्द व्यक्ति को सीधे धार्मिक परिवर्तन के लिये तैयार करने के बजाय पहले उसकी परेशानी में मदद की जाती थी। धीरे-धीरे वह मदद करने वाले लोगों के सम्पर्क में आता और फिर उसे प्रार्थना सभा में बुलाया जाता था।


शादी और रोजगार का लालच

लोगों को केवल इलाज या आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि रोजगार और शादी कराने का भरोसा दिलाकर मतान्तरण कराया जाता था। गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी कराने,नौकरी दिलाने और आर्थिक मदद की पेशकश की जाती थी। जाँच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग सामाजिक वर्गों के लिये अलग तरह की मदद का भरोसा दिया जाता था। आरोप है कि गरीब परिवारों को रोजगार और बच्चों की शिक्षा दिलाने का झाँसा दिया जाता था। ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिये पुलिस बैंक खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच कर रही है।


प्रार्थना सभा में पहुँचने लगे लोग

मोहनलालगंज के गौरा और आसपास के गाँवों के रहने वाले रामलाल, महिपाल, श्रीकान्त और उनकी पत्नी, मलखान समेत कई लोगों ने बताया कि उन्हें प्रार्थना सभाओं में शामिल होने के लिये बुलाया जाने लगा। उन्होने बताया कि कुछ लोगों ने पहले आर्थिक सहायता ली और बाद में रविवार की प्रार्थना सभा में जाने लगे। धीरे-धीरे गाँव में ही प्रार्थना सभा का आयोजन शुरू होने और फिर चर्च जैसी गतिविधियाँ विकसित होने लगी। एक स्थान पर रविवार को नियमित रूप से प्रार्थना सभा होती थी और उसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ती गयी।


निगोहाँ, नगराम तक फैला दायरा

मोहनलालगंज के साथ निगोहाँ, नगराम और आसपास के इलाकों में भी कथित गतिविधियों की जानकारी जुटायी जा रही है। कृष्णानगर और आलमबाग क्षेत्र में भी प्रार्थना सभाओं से जुड़ी शिकायतें सामने आयीं, जो विभिन्न अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित हुईं। पुलिस की सख्ती के बाद कुछ स्थानों पर रविवार की प्रार्थना सभाओं में भीड़ कम होने लगी।


रात में गाँवों तक पहुँचने की बात

स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को दिये गये बयानों में गिरोह के सदस्यों के रात में गाँवों तक पहुँचने की जानकारी सामने आयी है। रिपोर्टों के अनुसार चार-पहिया वाहन से लोगों के घरों तक पहुँचकर बैठक करते थे। कई बार स्थानीय स्तर पर पहले से सम्पर्क में आये लोगों के घरों पर बैठक होने की बात कही गयी है। इन बैठकों में आर्थिक परेशानी, बीमारी, रोजगार और पारिवारिक समस्याओं पर बातचीत के बाद धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का प्रस्ताव दिये जाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन बैठकों की जानकारी किसके पास रहती थी और वाहन किसके नाम पर था। बरामद बोलेरो की भी जाँच की जा रही है।


डायरी के नोट्स बने अहम कड़ी

तमिलनाडु से आये सात लोगों की गिरफ्तारी के दौरान मिली डायरी को पुलिस जाँच में महत्त्वपूर्ण मान रही है। डायरी में दर्ज नाम, सम्पर्क और अन्य जानकारियों से नेटवर्क के दूसरे लोगों तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। पूछताछ में कुछ ऐसे नाम सामने आये हैं, जिन्हें आगे एफआईआर में शामिल किया जा सकता है। डायरी के साथ बैंक स्टेटमेंट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। अब दोनों को मिलाकर देखा जा रहा है कि किस व्यक्ति के खाते में पैसा आया, किसे भेजा गया और किस अवधि में लेन-देन हुआ।


1998 से सक्रिय रहने का दावा

मामले में सामने आयी सबसे पुरानी कड़ी वर्ष 1998 की बतायी गयी है। डेनियल को उसी समय लखनऊ भेजा गया था। बाद में वह धार्मिक प्रचार-प्रसार से जुड़ा और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने लगा। अगर जाँच में यह अवधि प्रमाणित होती है तो यह मामला हाल के कुछ वर्षों में शुरू हुई गतिविधि भर नहीं रहेगा। पुलिस को पिछले करीब तीन दशक के दौरान उसके सम्पर्क में आये लोगों, संगठनों, संस्थानों और वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल करनी होगी। इसी अवधि में लखनऊ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जिन प्रार्थना सभाओं, चर्च या सामाजिक सेवा गतिविधियों का विस्तार हुआ, उनकी भी जानकारी जुटाना जाँच का हिस्सा बन सकता है।


महीने आने वाली रकम की भी जाँच

जाँच में यह आरोप भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी के बैंक खाते में नियमित रूप से धनराशि आती थी। एक रिपोर्ट में हर महीने दो से तीन लाख रुपये तक की फण्डिंग की बात कही गयी है। इस रकम का इस्तेमाल ग्रामीणों को घरेलू सामान या अन्य आर्थिक मदद देने में किया जाता था। पुलिस इस रकम के स्रोत की जाँच कर रही है। रिपोर्टों में पुडुचेरी से फण्डिंग का दावा भी किया गया है। बैंक खाते, डिजिटल भुगतान, नकद लेनदेन और सामान की खरीद के रिकॉर्ड से नेटवर्क की वास्तविक संरचना सामने आ सकती है।


15 पीड़ितों के बयान दर्ज

पुलिस ने मामले में करीब 15 लोगों के के बयान दर्ज किये हैं। इन बयानों में ग्रामीणों ने अलग-अलग तरीके से सम्पर्क किये जाने की जानकारी दी है। कुछ लोगों ने आर्थिक मदद, कुछ ने इलाज और कुछ ने धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने की बात बतायी है। बयान दर्ज करने के बाद पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन लोगों का सम्पर्क किस व्यक्ति से हुआ था। क्या सभी को एक ही व्यक्ति ने जोड़ा या अलग-अलग गाँवों में अलग-अलग लोग सम्पर्क करते थे, यह भी जाँच का विषय है। यदि अलग-अलग गाँवों में एक जैसे तरीके से लोगों से सम्पर्क किया गया है तो इससे किसी संगठित प्रक्रिया की पुष्टि में मदद मिल सकती है।


100 गुना बढ़े ईसाई मतदाता

मोहनलालगंज नगर पंचायत क्षेत्र में ईसाई मतदाताओं की संख्या को लेकर भी दावा किया गया है। इसमें करीब 15 साल पहले लगभग 30 ईसाई मतदाता होने और वर्तमान में यह संख्या 3000 से अधिक हो गयी है।


फुलवरिया और गौरा तक सम्पर्क

मोहनलालगंज ही नहीं फुलवरिया, गौरा, ज्योति नगर समेत आसपास के क्षेत्रों में मतान्तरण का खेल चल रहा था। इन स्थानों पर रहने वाले कुछ लोगों के कथित तौर पर प्रार्थना सभाओं से जुड़ने की जानकारी सामने आयी है। पहले सामाजिक मदद, शिक्षा, इलाज या अन्य सहायता के माध्यम से लोगों से सम्पर्क बनाया गया। इसके बाद धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने का सिलसिला शुरू हुआ।


2007 में खुले चर्च जाँच के दायरे में

मोहनलालगंज क्षेत्र में वर्ष 2007 में एक चर्च का उद्घाटन हुआ था। इस चर्च का उद्घाटन तत्कालीन सांसद ने किया था और शुरुआत में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार को उद्देश्य बताया गया था। बाद में वहाँ धार्मिक गतिविधियाँ बढ़ने और प्रार्थना सभाओं में लोगों की भागीदारी बढ़ने लगी। अब चर्च भी जाँच के दायरे में है। कहीं आरोपियों की कड़ी चर्च से तो नहीं जुड़ी है।


पढ़ाई के बहाने गाँवों तक पहुंच

गिरोह ने गाँवों में पहुँचने के लिये शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का रास्ता अपनाया। कुछ स्थानों पर पहले बच्चों को पढ़ाई के लिये जुटाया गया और बाद में परिवारों से सम्पर्क बढ़ाया गया। इसके बाद आर्थिक मदद और धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला शुरू हुआ।


रोगियों पर धर्म-परिवर्तन का दबाव

सामाजिक कार्यकर्ता के हवाले से आरोप लगाया गया कि वर्ष 1985 में मोहनलालगंज स्थित एक मिशनरी संस्था में रह रहे करीब 200 कुष्ठ रोगियों पर धर्म-परिवर्तन का दबाव बनाया गया था। जन्माष्टमी जैसे धार्मिक पर्व मनाने को लेकर आपत्ति जतायी गयी थी और इसके बाद कुछ रोगियों पर कथित दबाव की बात सामने आयी।

2022 का मामला भी सामने आया की वर्ष 2022 में तीन लोगों पर धर्मान्तरण कराने का आरोप लगाया गया था। जिसकी एफआईआर निगोहां थाने में दर्ज है। इसमें शिकायतकर्ता ओर से नाम न लिखने की शर्त पर पुलिस को जानकारी देने की बात सामने आयी थी। इसके बाद सेदापुर और आसपास के इलाकों में छापेमारी की गयी थी।


गरीब परिवार निशाने पर

गिरोह जाति और आर्थिक स्थिति के आधार पर लोगों तक पहुँच बना रहा था। खासतौर पर गरीब और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाता था। अलग-अलग सामाजिक समूहों के लिये अलग तरह के आर्थिक प्रस्ताव रखे जाते थे। कहीं रोजगार और शादी की मदद का भरोसा दिया जाता था तो कहीं बीमारी के इलाज और बच्चों की पढ़ायी की बात की जाती थी।


पुलिस के सामने तीन बड़ी चुनौतियाँ

मामले की जाँच आगे बढ़ने के साथ पुलिस के सामने तीन बड़े सवाल हैं। पहला, इस नेटवर्क का वास्तविक वित्तीय स्रोत क्या था। दूसरा, उत्तर प्रदेश में इससे जुड़े लोगों की संख्या कितनी है। तीसरा, तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों में मौजूद सम्पर्कों की भूमिका कितनी थी।
बैंक खातों की जाँच से पहले सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद है। डायरी, मोबाइल फोन और दस्तावेज दूसरे सवाल का जवाब दे सकते हैं। वहीं पूछताछ और दूसरे राज्यों की पुलिस से समन्वय तीसरे सवाल की कड़ी खोल सकता है। पुलिस के अनुसार आरोपियों की बैंकिंग गतिविधियों की जाँच की जा रही है और कुछ नये नाम सामने आने की सम्भावना है।


प्रार्थना सभाओं पर पुलिस की नजर

मामला सामने आने के बाद मोहनलालगंज और आसपास के इलाकों में होने वाली प्रार्थना सभाओं पर पुलिस की निगरानी बढ़ी है। कुछ स्थानों पर पुलिस की सख्ती के बाद पहले के मुकाबले कम लोग पहुँच रहे हैं। कृष्णानगर के आश्रम रोड स्थित एक मकान में भी रविवार को गतिविधियों की शिकायत का उल्लेख रिपोर्ट में हुआ है। हालाँकि पुलिस की निगरानी बढ़ने के बाद वहाँ पहुँच रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *