माँ की सेवा से बड़ी महादेव की कोई पूजा नहीं

6 बेटों ने मां को पालकी में बैठाकर बुलंदशहर पहुंचाया

बुलंदशहर में छह बेटों की मातृभक्ति की तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। छह भाइयों ने अपनी बुजुर्ग मां को पालकी में बैठाकर हरिद्वार से बुलंदशहर तक की करीब कई सौ किलोमीटर की यात्रा पूरी की। महादेव की भक्ति के साथ मां की सेवा और सम्मान का यह अनोखा अंदाज रास्ते में लोगों का ध्यान खींचता रहा।


परिवार के मुताबिक, यात्रा 2 अगस्त को हरिद्वार से शुरू हुई थी। इसके अगले दिन यानी 3 अगस्त को छहों भाई अपनी मां को पालकी में बैठाकर बुलंदशहर के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान भाइयों ने रोजाना करीब 40 किलोमीटर पैदल सफर तय किया। मां को पैदल चलने में परेशानी न हो, इसलिए बेटों ने उन्हें पालकी में बैठाया। सभी भाई बारी-बारी से पालकी को अपने कंधों पर उठाते रहे और यात्रा पूरी की।
बारी-बारी से कंधे पर उठाई पालकी


लंबी दूरी की इस यात्रा के दौरान भाइयों ने मां की सुविधा का पूरा ध्यान रखा। एक भाई थकता तो दूसरा पालकी संभाल लेता। इस तरह छहों भाई बारी-बारी से मां को कंधे पर लेकर आगे बढ़ते रहे। रास्ते में जब लोगों ने छह बेटों को मां की पालकी उठाकर पैदल चलते देखा तो वे भी रुककर इस दृश्य को देखने लगे। कई लोगों ने बेटों के समर्पण और संस्कार की सराहना की।
बोले- मां की खुशी ही सबसे बड़ी पूजा


बेटों का कहना है कि मां ने उन्हें जीवन दिया और उनके लिए मां की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उनका मानना है कि मां की खुशी से बढ़कर महादेव की कोई पूजा नहीं हो सकती। हरिद्वार से बुलंदशहर तक मां को पालकी में बैठाकर की गई यह यात्रा परिवार के लिए केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि मां के प्रति सम्मान, प्रेम और सेवा का संकल्प भी है। छहों भाइयों की मातृभक्ति की यह तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *